समुद्र की गहराइयों में ऐसे अनेक जीव रहते हैं, जिनकी क्षमताएं किसी विज्ञान कथा से कम नहीं लगती है। इनमें कुछ जीव अपनी विचित्र आकृति से चौंकाते हैं, तो कुछ अपने अनोखे व्यवहार से वैज्ञानिकों को भी हैरान कर देते हैं। ऐसा ही एक अद्भुत जीव है ‘जैपेटेला डायफाना’ (Japetella diaphana) नामक ऑक्टोपस, जो अपनी जान बचाने के लिए रंग बदलने और लगभग अदृश्य हो जाने की अनोखी कला जानता है। यह समुद्री जीव न केवल प्रकृति की अद्भुत रचना है, बल्कि जीवों के अनुकूलन की शानदार मिसाल भी है।
जैपेटेला डायफाना एक विशेष प्रकार का ऑक्टोपस है, जो समुद्र की गहराइयों में खुले जल क्षेत्र में रहता है। सामान्यतः समुद्री जीव चट्टानों, मूंगों या समुद्री पौधों के बीच छिपकर अपनी रक्षा करते हैं, लेकिन इस ऑक्टोपस की स्थिति अलग है। यह खुले समुद्र में रहता है, जहां उसके आसपास छिपने के लिए कोई स्थायी जगह नहीं होती। ऐसे वातावरण में जीवित रहना आसान नहीं होता। बड़े शिकारी जीव लगातार भोजन की तलाश में घूमते रहते हैं। ऐसे में जैपेटेला डायफाना ने खुद को बचाने के लिए एक असाधारण तरीका विकसित कर लिया है।
इस ऑक्टोपस की सबसे खास विशेषता इसका लगभग पारदर्शी शरीर है। सामान्य स्थिति में इसका शरीर इतना पारदर्शी हो जाता है कि सूरज की रोशनी इसके आर-पार निकल जाती है। इसका फायदा यह होता है कि इसकी कोई स्पष्ट परछाई नहीं बनती। समुद्र में कई शिकारी जीव अपने शिकार को परछाई या शरीर की आकृति देखकर पहचानते हैं। लेकिन जब यह ऑक्टोपस पारदर्शी हो जाता है तो यह आसपास के पानी में लगभग गायब-सा दिखाई देता है। इसे प्रकृति का अद्भुत छलावरण या ‘कैमोफ्लाज’ कहा जा सकता है। यह क्षमता इसे खुले समुद्र में जीवित रहने में बहुत मदद करती है।
हालांकि पारदर्शिता इसकी सबसे बड़ी रक्षा तकनीक है, लेकिन हर परिस्थिति में यह पर्याप्त नहीं होती। समुद्र के गहरे हिस्सों में कुछ शिकारी जीव जैविक रोशनी यानी बायोल्यूमिनेसेंस का उपयोग करते हैं। ये जीव अपने शरीर से रोशनी पैदा करके शिकार को खोजते हैं। जब ऐसा प्रकाश जैपेटेला डायफाना पर पड़ता है, तब इसकी पारदर्शिता कम प्रभावी हो सकती है। यहीं इसकी दूसरी अद्भुत क्षमता सामने आती है। खतरा महसूस होते ही यह अचानक अपना रंग बदलकर गहरे नारंगी रंग में बदल जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह गहरा रंग रोशनी को सोख लेता है। इससे जैविक प्रकाश इसके शरीर से परावर्तित नहीं हो पाता और शिकारी इसे आसानी से नहीं देख पाते हैं।
जीव-जगत में रंग बदलना कोई नई बात नहीं है। गिरगिट, कुछ मछलियां और अन्य समुद्री जीव भी रंग बदलते हैं। लेकिन जैपेटेला डायफाना की विशेषता यह है कि यह स्थिति के अनुसार अपनी रणनीति बदलता है। एक तरफ यह पारदर्शी बनकर स्वयं को अदृश्य करता है, वहीं दूसरी ओर आवश्यकता पड़ने पर गहरे रंग का कवच धारण कर लेता है। यह दोहरी सुरक्षा प्रणाली प्रकृति की बुद्धिमत्ता को दर्शाती है। यह साबित करता है कि जीव अपने वातावरण के अनुसार किस प्रकार खुद को ढाल लेते हैं।
जैपेटेला डायफाना की क्षमताओं ने वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। शोधकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह ऑक्टोपस इतनी तेजी से अपना रंग कैसे बदलता है और उसके शरीर की कोशिकाएं प्रकाश के प्रति कैसी प्रतिक्रिया देती हैं। यदि वैज्ञानिक इसकी तकनीक को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं, तो भविष्य में इससे नई तकनीकों का विकास संभव हो सकता है। उदाहरण के लिए सैन्य उपकरणों, पानी के भीतर काम करने वाले रोबोट और विशेष प्रकार के कपड़ों में ऐसी तकनीक उपयोगी हो सकती है जो परिस्थिति के अनुसार रंग बदल सके।
धरती का अधिकांश हिस्सा समुद्र से घिरा हुआ है, लेकिन समुद्र की गहराइयों के बारे में आज भी बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। वैज्ञानिक मानते हैं कि समुद्र में अब भी हजारों ऐसी प्रजातियां मौजूद हैं, जिनके बारे में इंसानों को जानकारी नहीं है। जैपेटेला डायफाना जैसे जीव हमें यह एहसास कराते हैं कि प्रकृति के भीतर कितने अनोखे रहस्य छिपे हैं।
जैपेटेला डायफाना केवल एक ऑक्टोपस नहीं, बल्कि प्रकृति की अद्भुत इंजीनियरिंग का उदाहरण है। पारदर्शी बनने और जरूरत पड़ने पर रंग बदलने की इसकी क्षमता इसे समुद्र के सबसे दिलचस्प जीवों में शामिल करती है। यह जीव सिखाता है कि जीवन में परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना कितना महत्वपूर्ण है। समुद्र की गहराइयों में रहने वाला यह छोटा जीव अपने अनोखे गुणों से दुनिया को यह संदेश देता है कि प्रकृति हमेशा आश्चर्यों से भरी रहती है।
