बिहार में बनेगी कम्प्रेस्ड बॉयोगैस नीति

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार सरकार राज्य में स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसके तहत कम्प्रेस्ड बॉयोगैस (सीबीजी) उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए नई सीबीजी नीति तैयार की जा रही है। हाल ही में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव दीपक आनंद की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इस नीति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस पहल का उद्देश्य राज्य में उपलब्ध जैविक संसाधनों का बेहतर उपयोग कर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है।


कम्प्रेस्ड बॉयोगैस एक स्वच्छ और नवीकरणीय ईंधन है, जिसे कृषि अवशेष, गोबर, जैविक कचरे और अन्य जैविक पदार्थों से तैयार किया जाता है। इसकी गुणवत्ता प्राकृतिक गैस के समान होती है और इसका उपयोग वाहनों, उद्योगों तथा घरेलू जरूरतों में किया जा सकता है। सीबीजी उत्पादन से न केवल ऊर्जा का नया स्रोत मिलता है, बल्कि कचरा प्रबंधन की समस्या का भी समाधान होता है।


राज्य सरकार द्वारा आयोजित बैठक में नगर विकास एवं आवास, कृषि, पशु एवं मत्स्य संसाधन, उद्योग तथा पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के अलावा इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए राज्य सीबीजी नीति के मॉडल ड्राफ्ट पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बिहार में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीति बनाने पर जोर दिया, जिससे निवेशकों को आकर्षित किया जा सके और अधिक से अधिक सीबीजी संयंत्र स्थापित हो सके।


बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां हर वर्ष बड़ी मात्रा में कृषि अवशेष उत्पन्न होते हैं। इन अवशेषों का एक बड़ा हिस्सा या तो बेकार चला जाता है या फिर खेतों में जला दिया जाता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। नई नीति के तहत कृषि अवशेषों, गोबर, शहरी ठोस अपशिष्ट और अन्य जैविक कचरे का उपयोग सीबीजी उत्पादन में किया जाएगा। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और कृषि अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। पशुपालन से जुड़े किसानों के लिए भी यह एक नई आर्थिक संभावना लेकर आएगा।


सीबीजी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं पर विचार कर रही है। बैठक में भूमि उपलब्धता, वित्तीय सहायता, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और विपणन व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यदि राज्य में बड़े पैमाने पर सीबीजी संयंत्र स्थापित होते हैं, तो इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों का विकास होगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।


सीबीजी उत्पादन का सबसे बड़ा लाभ पर्यावरण को होगा। जैविक कचरे का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में होने से कचरा निस्तारण की समस्या कम होगी। साथ ही, कृषि अवशेष जलाने की घटनाओं में कमी आएगी, जिससे वायु प्रदूषण घटेगा। इसके अतिरिक्त, सीबीजी के उपयोग से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भी कमी आएगी। यह कदम जलवायु परिवर्तन से निपटने के राष्ट्रीय और वैश्विक प्रयासों को भी मजबूती प्रदान करेगा।


इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां इस परियोजना की सफलता में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इनके पास गैस विपणन और वितरण का व्यापक नेटवर्क है, जिससे उत्पादित सीबीजी को बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होगी। इसके अलावा, ये कंपनियां तकनीकी सहयोग और निवेश के माध्यम से भी राज्य में सीबीजी उद्योग के विकास में योगदान दे सकती हैं।


बिहार सरकार की प्रस्तावित कम्प्रेस्ड बॉयोगैस नीति राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव का आधार बन सकती है। यह नीति कृषि, पर्यावरण, उद्योग और ग्रामीण विकास जैसे अनेक क्षेत्रों को एक साथ लाभ पहुंचाने की क्षमता रखती है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो बिहार न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में देश के अग्रणी राज्यों में भी अपनी पहचान बना सकता है। आने वाले समय में यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।



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