भारत में हवाई यात्रा को अधिक सुविधाजनक, तेज और सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में डिजीयात्रा (Digi Yatra) पहल को बड़ी सफलता मिली है। अब अगले वर्ष तक देश के 27 और हवाई अड्डों पर डिजीयात्रा सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। इससे यात्रियों को हवाई अड्डों पर प्रवेश और सुरक्षा जांच के दौरान लंबी कतारों से काफी हद तक राहत मिलेगी। चेहरे की पहचान (Facial Recognition Technology) पर आधारित यह प्रणाली यात्रियों को संपर्करहित और निर्बाध यात्रा अनुभव प्रदान करती है। वर्तमान में कई प्रमुख हवाई अड्डों पर यह सुविधा उपलब्ध है और यात्रियों से इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया भी मिली है।
डिजीयात्रा एक डिजिटल पहचान आधारित प्रणाली है, जिसके माध्यम से यात्रियों की पहचान उनके चेहरे के जरिए की जाती है। इस प्रक्रिया में बार-बार टिकट और पहचान पत्र दिखाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। यात्री डिजीयात्रा मोबाइल ऐप पर अपना प्रोफाइल बनाकर आधार अथवा अन्य वैध पहचान दस्तावेजों के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद कैमरा यात्री के चेहरे की पहचान करता है और उसके टिकट से जुड़ी जानकारी का सत्यापन करता है। इसके बाद यात्री को प्रवेश, सुरक्षा जांच और बोर्डिंग गेट तक बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेजी प्रक्रिया के जाने की अनुमति मिल जाती है।
डिजीयात्रा का सबसे बड़ा लाभ समय की बचत है। सामान्यतः हवाई अड्डों पर प्रवेश, सुरक्षा जांच और बोर्डिंग के दौरान कई बार पहचान पत्र और टिकट दिखाने पड़ते हैं। इससे कतारें लंबी हो जाती हैं और यात्रियों को प्रतीक्षा करनी पड़ती है। डिजीयात्रा के माध्यम से प्रवेश प्रक्रिया तेज होगी। लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता कम होगी। यात्रा अनुभव अधिक सुविधाजनक बनेगा। कागजी दस्तावेजों का उपयोग घटेगा। सुरक्षा जांच प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। विशेष रूप से व्यस्त हवाई अड्डों पर यह तकनीक यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।
डिजीयात्रा केवल सुविधा का माध्यम नहीं है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत बनाती है। चेहरे की पहचान तकनीक के माध्यम से यात्री की पहचान का सटीक सत्यापन किया जाता है। इससे फर्जी पहचान या दस्तावेजों के दुरुपयोग की संभावना कम हो जाती है। सरकार और संबंधित एजेंसियों का कहना है कि यात्रियों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। डेटा को सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड रूप में रखा जाता है तथा निर्धारित अवधि के बाद उसे स्वतः हटा दिया जाता है।
वर्तमान में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, वाराणसी, हैदराबाद, पुणे और अन्य कई प्रमुख हवाई अड्डों पर डिजीयात्रा सुविधा उपलब्ध है। यात्रियों की बढ़ती संख्या और सकारात्मक अनुभवों को देखते हुए इसे देश के 27 अतिरिक्त हवाई अड्डों तक विस्तारित किया जा रहा है। इस विस्तार के बाद छोटे और मध्यम श्रेणी के शहरों के यात्री भी इस आधुनिक सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि देश के अधिकतम हवाई अड्डों को डिजिटल और स्मार्ट बनाया जाए, जिससे यात्रियों को विश्वस्तरीय सेवाएं मिल सके।
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक है। हर वर्ष करोड़ों लोग हवाई यात्रा करते हैं। ऐसे में आधुनिक तकनीकों का उपयोग समय की मांग बन गया है। डिजीयात्रा जैसी पहलें न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाती हैं, बल्कि हवाई अड्डों की कार्यक्षमता को भी बेहतर बनाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बायोमेट्रिक पहचान और डिजिटल सेवाओं का उपयोग विमानन क्षेत्र में और अधिक बढ़ेगा। डिजीयात्रा इस परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डिजीयात्रा योजना भारत के विमानन क्षेत्र में डिजिटल क्रांति का प्रतीक बन चुकी है। चेहरे की पहचान तकनीक के माध्यम से यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिल रहा है। अगले वर्ष तक 27 और हवाई अड्डों पर इस सुविधा के विस्तार से लाखों यात्रियों को लाभ होगा। यह पहल न केवल हवाई यात्रा को आधुनिक बना रही है, बल्कि डिजिटल भारत के सपने को भी नई गति प्रदान कर रही है। आने वाले समय में डिजीयात्रा देश के अधिकांश हवाई अड्डों पर यात्रियों की यात्रा का अभिन्न हिस्सा बन सकती है।
