बिहार में खुलेंगे 21 नए पालनाघर

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार सरकार ने कामकाजी महिलाओं और परिवारों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य में छह माह से पांच वर्ष तक के बच्चों की देखभाल और संरक्षण के लिए 21 नए पालनाघरों (क्रेच) की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही राज्य में संचालित पालनाघरों की संख्या बढ़कर 100 तक पहुंच जाएगी। वर्तमान में बिहार के विभिन्न जिलों में 79 पालनाघर संचालित हो रहे हैं। 


यह पहल मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य कामकाजी महिलाओं को अपने बच्चों की देखभाल की चिंता से मुक्त कर उन्हें अपने कार्यस्थल पर अधिक आत्मविश्वास और एकाग्रता के साथ काम करने का अवसर प्रदान करना है।


पालनाघर ऐसी सुविधा है जहां छोटे बच्चों की दिनभर देखभाल की जाती है। यहां बच्चों को सुरक्षित वातावरण, पोषणयुक्त भोजन, खेल-कूद, प्रारंभिक शिक्षा तथा स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। विशेष रूप से छह माह से पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए यह व्यवस्था अत्यंत उपयोगी है। इस उम्र में बच्चों को निरंतर देखभाल और निगरानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में नौकरीपेशा माता-पिता के लिए पालनाघर एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरते हैं।


राज्य सरकार की योजना के अनुसार,  नए पालनाघरों की स्थापना मुख्य रूप से समाहरणालय परिसरों तथा उनके आसपास के क्षेत्रों में की जाएगी। इन स्थानों पर बड़ी संख्या में महिला और पुरुष कर्मचारी कार्यरत रहते हैं। कार्यालय आने वाले कर्मचारी अपने छोटे बच्चों को पालनाघर में छोड़ सकेंगे और कार्यालय अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें अपने साथ घर ले जा सकेंगे। इससे न केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि अभिभावकों की मानसिक चिंता भी कम होगी।


आज के समय में बड़ी संख्या में महिलाएं सरकारी और निजी क्षेत्रों में कार्यरत हैं। हालांकि छोटे बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी अक्सर महिलाओं के कंधों पर अधिक होती है। कई बार मातृत्व के बाद महिलाओं को नौकरी छोड़ने या करियर में समझौता करने की स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पालनाघरों की उपलब्धता महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वे अपने बच्चों की सुरक्षा और देखभाल को लेकर निश्चिंत रहकर अपने कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी। यह पहल महिलाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उनकी कार्यस्थल पर भागीदारी को भी प्रोत्साहित करेगी।


योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सहायता प्रदान करना है, लेकिन इसका लाभ पुरुष कर्मचारियों को भी मिलेगा। वर्तमान समय में बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी केवल माताओं तक सीमित नहीं रह गई है। कई परिवारों में माता-पिता दोनों नौकरी करते हैं। ऐसी स्थिति में पालनाघर की सुविधा परिवार के दोनों सदस्यों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। इससे बच्चों की देखभाल को लेकर परिवारों की परेशानी काफी हद तक कम होगी।


पालनाघर केवल बच्चों को रखने का स्थान नहीं है, बल्कि उनके प्रारंभिक विकास का भी केंद्र है। यहां प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। उन्हें खेल-खेल में सीखने का अवसर मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन के शुरुआती पांच वर्ष बच्चे के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण देखभाल बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में सहायक होती है। पालनाघरों में बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे उनका समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।


वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने कुल 100 पालनाघरों के संचालन का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में संचालित 79 पालनाघरों के अतिरिक्त 21 नए केंद्र स्थापित होने के बाद यह लक्ष्य पूरा हो जाएगा। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में इस व्यवस्था का और अधिक विस्तार किया जा सकता है ताकि अधिक से अधिक परिवार इसका लाभ उठा सके।


मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत शुरू की गई यह पहल महिला सशक्तीकरण के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है। महिलाओं को रोजगार, शिक्षा और सामाजिक भागीदारी के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। पालनाघरों की संख्या बढ़ने से महिलाओं को न केवल अपने करियर को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि बच्चों को भी सुरक्षित और विकासोन्मुख वातावरण प्राप्त होगा। यह कदम परिवार, समाज और राज्य, तीनों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।


बिहार में 21 नए पालनाघरों की स्थापना का निर्णय एक दूरदर्शी और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण पहल है। इससे हजारों कामकाजी माता-पिता को राहत मिलेगी तथा छोटे बच्चों को सुरक्षित, पोषणयुक्त और विकासोन्मुख वातावरण प्राप्त होगा। महिला सशक्तीकरण और बाल कल्याण के दोहरे उद्देश्य को पूरा करने वाली यह योजना राज्य के सामाजिक विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।



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