बिहार में दो पहिया और तीन पहिया वाहन खरीदने वालों को जल्द ही अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है। राज्य सरकार मोटर वाहन कर (रोड टैक्स) में एक प्रतिशत की वृद्धि करने की तैयारी कर रही है। परिवहन विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करना शुरू कर दिया है और जल्द ही इसे राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो नई बाइक, स्कूटर, ई-रिक्शा, ऑटो रिक्शा तथा अन्य तीन पहिया वाहन खरीदने वालों को पहले की तुलना में अधिक टैक्स देना होगा। सरकार का अनुमान है कि इस निर्णय से राज्य के राजस्व में प्रतिवर्ष लगभग 400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि होगी।
फिलहाल बिहार में दो पहिया वाहनों पर उनकी कीमत के आधार पर रोड टैक्स निर्धारित किया जाता है। एक लाख रुपये तक की कीमत वाले दो पहिया वाहन पर 8 प्रतिशत मोटर वाहन कर लगता है। वहीं एक लाख रुपये से अधिक कीमत वाले दो पहिया वाहन पर 9 प्रतिशत कर लगाया जाता है। यदि प्रस्तावित वृद्धि लागू होती है तो यह दर क्रमशः 9 प्रतिशत और 10 प्रतिशत हो सकती है। इसी प्रकार तीन पहिया वाहनों पर भी कर की दर में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना है।
रोड टैक्स बढ़ने का सीधा प्रभाव वाहन की ऑन-रोड कीमत पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति एक लाख रुपये की बाइक खरीदता है, तो उसे वर्तमान की तुलना में लगभग एक हजार रुपये अधिक टैक्स देना पड़ सकता है। महंगे वाहनों के मामले में यह राशि और अधिक होगी। हालांकि यह बढ़ोतरी प्रतिशत के हिसाब से छोटी दिखाई देती है, लेकिन बड़ी संख्या में वाहन खरीदने वालों के लिए यह अतिरिक्त खर्च महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। विशेष रूप से मध्यम वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव अधिक महसूस किया जा सकता है, क्योंकि दो पहिया वाहन आज उनकी दैनिक जरूरत का प्रमुख साधन बन चुके हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि सड़क अवसंरचना, यातायात प्रबंधन, सड़क सुरक्षा तथा परिवहन सेवाओं के विस्तार के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है। बढ़ते वाहन पंजीकरण के साथ सड़कों के रखरखाव और नई परियोजनाओं पर भी खर्च बढ़ रहा है। परिवहन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि मोटर वाहन कर में मामूली वृद्धि से सरकार को स्थायी राजस्व स्रोत प्राप्त होगा। अनुमान है कि एक प्रतिशत की वृद्धि से राज्य को हर वर्ष लगभग 400 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त होंगे, जिसे सड़क निर्माण, मरम्मत और यातायात सुविधाओं के विकास में लगाया जा सकता है।
बिहार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान दो पहिया वाहनों की बिक्री में लगातार वृद्धि हुई है। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी बाइक और स्कूटर की मांग बढ़ी है। इसी तरह रोजगार और सार्वजनिक परिवहन के साधन के रूप में तीन पहिया वाहनों का उपयोग भी तेजी से बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन बिक्री के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए सरकार ने राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए यह कदम उठाने का फैसला किया है। हालांकि उद्योग जगत और वाहन डीलरों का एक वर्ग मानता है कि कर वृद्धि से शुरुआती स्तर पर बिक्री प्रभावित हो सकती है।
कर वृद्धि की खबर सामने आने के बाद वाहन खरीदारों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। कई लोगों का मानना है कि पहले से बढ़ती महंगाई के बीच वाहन खरीदना और महंगा हो जाएगा। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि एक प्रतिशत की वृद्धि बहुत अधिक नहीं है और इसका बिक्री पर सीमित प्रभाव पड़ेगा। ऑटोमोबाइल बाजार से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि सरकार बढ़े हुए राजस्व का उपयोग बेहतर सड़क और परिवहन सुविधाओं के विकास में करती है तो जनता इसे सकारात्मक रूप में भी देख सकती है।
फिलहाल यह प्रस्ताव प्रारंभिक चरण में है और अंतिम निर्णय राज्य मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद ही लिया जाएगा। यदि कैबिनेट हरी झंडी देती है तो नई कर दरें अधिसूचना जारी होने के बाद लागू की जा सकती हैं। ऐसे में जो लोग निकट भविष्य में नई बाइक, स्कूटर या तीन पहिया वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं, वे सरकार के अंतिम निर्णय पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में कैबिनेट की बैठक के बाद इस प्रस्ताव की दिशा और प्रभाव स्पष्ट हो जाएगा।
बिहार सरकार द्वारा दो पहिया और तीन पहिया वाहनों पर रोड टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव राजस्व बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सरकार को सालाना लगभग 400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है, लेकिन दूसरी ओर वाहन खरीदारों की जेब पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ेगा। अब सभी की निगाहें राज्य कैबिनेट पर टिकी हैं, जहां इस प्रस्ताव के भविष्य का फैसला होगा।
