बिहार के नगर निकायों में कार्यरत सफाई कर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 30 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। इस घोषणा के बाद राज्य के सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। हड़ताल का निर्णय बिहार लोकल बॉडीज एम्प्लॉयज फेडरेशन संयुक्त संघर्ष मोर्चा और बिहार राज्य स्थानीय कर्मचारी महासंघ की संयुक्त बैठक में लिया गया। बैठक पटना स्थित एटक कार्यालय में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश सिंह ने की।
सफाई कर्मियों की सबसे महत्वपूर्ण मांग दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने की है। लंबे समय से कार्यरत हजारों कर्मी स्थायी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से नगर निकायों में सेवा देने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं और सुरक्षा नहीं मिल रही हैं। नियमितीकरण से उन्हें नौकरी की स्थिरता, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर भविष्य की गारंटी मिलेगी।
संघर्ष मोर्चा ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था को समाप्त करने की भी मांग उठाई है। कर्मचारियों का आरोप है कि आउटसोर्सिंग के कारण श्रमिकों का आर्थिक और सामाजिक शोषण हो रहा है। ठेका कंपनियों के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को कम वेतन, सीमित सुविधाएं और असुरक्षित कार्य वातावरण का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि नगर निकाय सीधे नियुक्ति करें ताकि कर्मचारियों को उनके श्रम का उचित लाभ मिल सके।
सफाई कर्मियों ने केवल नियमितीकरण और आउटसोर्सिंग समाप्त करने की मांग ही नहीं उठाई है, बल्कि एक दर्जन से अधिक अन्य मांगों को भी सामने रखा है। इनमें वेतन विसंगतियों को दूर करना, समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना, सेवानिवृत्ति लाभ देना, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना तथा अन्य कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद सरकार और प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है।
हड़ताल से पहले आंदोलन की शुरुआत 30 जून को राज्यभर के सभी नगर निकायों में प्रदर्शन के साथ होगी। इस दिन कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में धरना और प्रदर्शन करेंगे। इसके माध्यम से वे सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि हड़ताल की सूचना दिए जाने के बाद दस दिनों के भीतर यदि वार्ता कर मांगों के समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 30 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। संगठन के नेताओं का कहना है कि वे टकराव नहीं चाहते, लेकिन कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी अब स्वीकार्य नहीं है। इसलिए सरकार को शीघ्र पहल करनी चाहिए।
यदि हड़ताल लंबी चली तो इसका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ेगा। शहरों में कचरे का उठाव बंद होने से स्वच्छता व्यवस्था चरमरा सकती है। सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे का ढेर लग सकता है, जिससे बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाएगा। बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है, क्योंकि गंदगी और जलजमाव मिलकर स्वास्थ्य संबंधी संकट पैदा कर सकते हैं।
सफाई कर्मी किसी भी शहर की स्वच्छता और स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। उनकी समस्याओं का समाधान केवल कर्मचारियों के हित में ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के हित में भी आवश्यक है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच सकारात्मक संवाद ही इस विवाद का सबसे बेहतर समाधान हो सकता है। यदि समय रहते सहमति बन जाती है तो न केवल हड़ताल टल सकती है, बल्कि लाखों नागरिकों को संभावित असुविधा से भी बचाया जा सकता है।
बिहार में सफाई कर्मियों द्वारा घोषित हड़ताल ने नगर निकाय प्रशासन और राज्य सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। कर्मचारियों की मांगें लंबे समय से लंबित हैं और अब वे निर्णायक संघर्ष के मूड में दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत ही तय करेगी कि यह आंदोलन समाधान की ओर बढ़ेगा या राज्यभर की सफाई व्यवस्था को प्रभावित करने वाली बड़ी हड़ताल में बदल जाएगा।
