उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध जंगलों में शुमार ‘जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क’ एक बार फिर अपनी जैव विविधता और प्राकृतिक चमत्कारों के कारण चर्चा में है। इस बार चर्चा का विषय कोई बाघ या तेंदुआ नहीं, बल्कि एक ऐसा हाथी है जिसके कानों का रंग लाल दिखाई देता है। हाल ही में नोएडा निवासी वन्यजीव प्रेमी शौर्य बिष्ट ने इस दुर्लभ हाथी की तस्वीर अपने कैमरे में कैद की, जिसके बाद यह तस्वीर तेजी से सोशल मीडिया और वन्यजीव जगत में चर्चा का विषय बन गई। यह हाथी अपने झुंड के अन्य हाथियों से बिल्कुल अलग दिखाई देता है और उसके लाल कान उसे एक विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे प्रकृति का अद्भुत उदाहरण मान रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार हाथियों के कानों का लाल दिखाई देना किसी बीमारी या असामान्य स्थिति का परिणाम नहीं है। इसके पीछे मुख्य कारण प्राकृतिक रंजकता और बढ़ती उम्र मानी जाती है। सामान्यतः एशियाई हाथियों के कानों पर छोटे-छोटे गुलाबी या हल्के रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। जैसे-जैसे हाथी की उम्र बढ़ती है, त्वचा में मौजूद रंगद्रव्य में परिवर्तन आने लगता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में कानों का बड़ा हिस्सा गुलाबी या लाल रंग का दिखाई देने लगता है। वन्यजीव वैज्ञानिकों का कहना है कि यह परिवर्तन पूरी तरह प्राकृतिक होता है और हाथी के स्वास्थ्य पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
जब किसी हाथी के कानों का बड़ा हिस्सा लाल रंग का हो जाता है तो वह अपने समूह में अत्यंत आकर्षक और प्रभावशाली दिखाई देता है। विशाल शरीर और लाल कानों का यह अनूठा संयोजन उसे किसी राजसी प्राणी जैसा स्वरूप प्रदान करता है। कॉर्बेट के जंगलों में घूमने वाले पर्यटक अक्सर बाघ देखने की इच्छा रखते हैं, लेकिन इस प्रकार के दुर्लभ दृश्य वन्यजीव पर्यटन को और अधिक रोमांचक बना देते हैं। लाल कान वाला यह हाथी अब जंगल सफारी में आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि अफ्रीका के हाथियों में उम्र बढ़ने के बावजूद इस प्रकार का लाल रंग बहुत कम देखने को मिलता है। अफ्रीकी हाथियों के कान आकार में बड़े होते हैं, लेकिन उनमें रंग परिवर्तन की यह प्रक्रिया सामान्य नहीं है। इसके विपरीत एशियाई हाथियों, विशेषकर भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले हाथियों में त्वचा की रंजकता में बदलाव अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यही कारण है कि कॉर्बेट में दिखा यह हाथी वन्यजीव विशेषज्ञों की विशेष रुचि का विषय बना हुआ है।
जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क केवल बाघों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यह एशियाई हाथियों के सबसे महत्वपूर्ण आवासों में से एक है। पार्क और उसके आसपास के वन क्षेत्रों में वर्तमान में 1250 से अधिक हाथी निवास करते हैं। घने जंगल, विस्तृत घास के मैदान, नदियां और पर्याप्त भोजन की उपलब्धता हाथियों के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करती हैं। यही कारण है कि कॉर्बेट क्षेत्र हाथियों की स्थायी और स्वस्थ आबादी बनाए रखने में सफल रहा है। यहां हाथियों के बड़े-बड़े झुंड नियमित रूप से देखे जा सकते हैं। कभी नदी किनारे पानी पीते हुए, तो कभी जंगल के रास्तों पर विचरण करते हुए ये विशाल जीव पर्यटकों को रोमांचित करते हैं।
लाल कान वाले हाथी का दिखना केवल एक रोचक घटना नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध जैव विविधता और सफल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों का भी प्रमाण है। यदि प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहे और वन्यजीवों को पर्याप्त संरक्षण मिले, तो प्रकृति समय-समय पर ऐसे अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती रहती है। कॉर्बेट में इस दुर्लभ हाथी की मौजूदगी यह दर्शाती है कि जंगल आज भी अपने भीतर अनेक रहस्य और आश्चर्य समेटे हुए हैं। ऐसे दृश्य न केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, बल्कि लोगों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक भी बनाते हैं।
जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में दिखाई दिया लाल कान वाला हाथी प्रकृति की अनूठी रचना का जीवंत उदाहरण है। प्राकृतिक रंजकता और उम्र के प्रभाव से उत्पन्न यह दुर्लभ स्वरूप हाथी को झुंड में अलग पहचान देता है। वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों और पर्यटकों के लिए यह दृश्य किसी सौभाग्य से कम नहीं है।
