शिक्षा मंत्री का ऐलान - मिथिला क्षेत्र में कक्षा पाँच तक मैथिली माध्यम से होगी पढ़ाई

Jitendra Kumar Sinha
0


 

बिहार सरकार ने मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने घोषणा की है कि मिथिला क्षेत्र के विद्यालयों में कक्षा पाँच तक की पढ़ाई मातृभाषा मैथिली के माध्यम से कराई जाएगी। यह निर्णय नई शिक्षा नीति की उस भावना के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमें प्रारंभिक शिक्षा बच्चों की मातृभाषा में देने पर विशेष बल दिया गया है। इस पहल से न केवल बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि मिथिला की समृद्ध भाषा और सांस्कृतिक विरासत को भी नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा।


चेतना समिति द्वारा आयोजित मासिक संगीत संध्या के उद्घाटन समारोह में शिक्षा मंत्री ने कहा कि मिथिला सदियों से अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं, साहित्य, संगीत, कला और लोक जीवन के लिए देश-दुनिया में पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी भाषा और संस्कृति होती है। यदि बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा उनकी मातृभाषा में मिलेगी तो वे विषयों को अधिक सहजता से समझ पाएंगे और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि मिथिला की गौरवशाली परंपरा को सहेजना और आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है। मातृभाषा में शिक्षा इस दिशा में एक प्रभावी कदम साबित होगी।


विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक कक्षाओं में मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा देने से बच्चों का बौद्धिक विकास अधिक प्रभावी होता है। वे कठिन विषयों को भी आसानी से समझते हैं और उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी कक्षा पाँच तक, और संभव हो तो उससे आगे भी, मातृभाषा या स्थानीय भाषा में शिक्षा देने की अनुशंसा करती है। मिथिला क्षेत्र में मैथिली माध्यम से पढ़ाई शुरू होने से विद्यार्थियों को अपनी भाषा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे भाषा संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय साहित्य और लोक संस्कृति के अध्ययन को भी नई गति मिलेगी।


कार्यक्रम में पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा ने भी मिथिला की सांस्कृतिक विरासत की चर्चा करते हुए कहा कि भाषा किसी समाज की आत्मा होती है। उन्होंने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया। इस अवसर पर दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर ने हस्तकला सह प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में मिथिला की पारंपरिक कला, शिल्प और स्थानीय उत्पादों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। सांसद धर्मशीला प्रसाद तथा मेयर सीता साहू ने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए हस्तशिल्प की उत्कृष्ट गुणवत्ता और मिथिला की कलात्मक समृद्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि मिथिला की कला विश्वभर में अपनी अलग पहचान रखती है और इसे व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यालयी शिक्षा में स्थानीय भाषा और संस्कृति को स्थान मिलता है तो बच्चों में अपनी पहचान और विरासत के प्रति सम्मान विकसित होता है। मैथिली में शिक्षा से स्थानीय लोककथाओं, लोकगीतों, साहित्य और सांस्कृतिक मूल्यों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही मिथिला पेंटिंग, लोक संगीत, लोक नृत्य और पारंपरिक शिल्प जैसी सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को भी नई ऊर्जा मिल सकती है। शिक्षा और संस्कृति का यह समन्वय क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


मिथिला क्षेत्र में कक्षा पाँच तक मैथिली माध्यम से शिक्षा देने की घोषणा केवल एक शैक्षणिक निर्णय नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय अस्मिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाता है और आवश्यक पाठ्य सामग्री, प्रशिक्षित शिक्षक तथा संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, तो यह मॉडल देश के अन्य भाषाई क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। मातृभाषा में शिक्षा बच्चों को ज्ञान से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करना भी सिखाएगी। यही इस पहल की सबसे बड़ी सफलता होगी।


एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top