चार सेंटीमीटर से भी छोटा - ‘कॉफी फ्रॉग’

Jitendra Kumar Sinha
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प्रकृति की दुनिया जितनी विशाल है, उतनी ही रहस्यमयी भी। जंगलों, पहाड़ों और वर्षावनों में आज भी ऐसी जीव-जंतुओं की प्रजातियां मौजूद हैं, जिनके बारे में वैज्ञानिकों को बहुत कम जानकारी है। इसी कड़ी में कोस्टा रिका से एक बेहद दिलचस्प मेंढक की खोज सामने आई है। वैज्ञानिकों ने यहां एक ऐसी नई प्रजाति की पहचान की है, जो दिन के बजाय रात में अधिक सक्रिय रहती है। अपनी खास आदत और कॉफी के पौधों से जुड़े रहने के कारण इसे अनौपचारिक रूप से ‘कॉफी फ्रॉग’ कहा जा रहा है। यह नन्हा मेंढक आकार में चार सेंटीमीटर से भी छोटा है, लेकिन इसकी जीवनशैली और व्यवहार इसे दूसरे सामान्य मेंढकों से अलग बनाते हैं। गहरे हरे धब्बों से सजे इसके शरीर को देखने पर यह अपने प्राकृतिक वातावरण में आसानी से छिप सकता है।

इस मेंढक की सबसे खास पहचान इसका निशाचर व्यवहार है। यानी यह दिन के मुकाबले रात में ज्यादा सक्रिय रहता है। सूरज ढलने के बाद जब जंगल और उसके आसपास का वातावरण शांत होने लगता है, तब यह छोटा जीव अपने ठिकाने से बाहर निकलता है। रात के अंधेरे में यह कॉफी की झाड़ियों पर बैठकर तेज आवाज निकालता है। वैज्ञानिकों के लिए इसकी आवाज भी इसकी पहचान का एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। आमतौर पर कई मेंढक अपनी आवाज के जरिए साथी को आकर्षित करने या दूसरे मेंढकों को अपनी मौजूदगी का संकेत देने का काम करते हैं। ऐसे में ‘कॉफी फ्रॉग’ की तेज पुकार इसके व्यवहार को समझने में वैज्ञानिकों की मदद कर सकती है।

इस प्रजाति को ‘कॉफी फ्रॉग’ नाम दिए जाने की वजह इसका कॉफी के पौधों के आसपास पाया जाना है। कोस्टा रिका कॉफी उत्पादन के लिए दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है और यहां के कई इलाकों में कॉफी के बागान तथा प्राकृतिक वन क्षेत्र एक-दूसरे के करीब दिखाई देते हैं। छोटा आकार और गहरे हरे धब्बे इस मेंढक को पत्तियों के बीच छिपने में मदद कर सकते हैं। रात के समय कॉफी की झाड़ियों पर बैठकर आवाज निकालना इसकी सबसे दिलचस्प विशेषताओं में से एक है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह प्रजाति फिलहाल केवल कोस्टा रिका में पाई गई है। मध्य अमेरिका का यह छोटा देश अपनी जैव विविधता के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। यहां वर्षावन, पहाड़ी क्षेत्र, नदियां और समुद्री तट अलग-अलग प्रकार के जीवों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराते हैं। यही वजह है कि कोस्टा रिका में समय-समय पर नई प्रजातियों की खोज वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए विशेष आकर्षण का विषय बनती रहती है। ‘कॉफी फ्रॉग’ की खोज भी इसी समृद्ध जैव विविधता की एक और मिसाल है।

किसी नई प्रजाति की खोज केवल एक नए जीव का नाम सामने आने तक सीमित नहीं होती। वैज्ञानिकों के लिए इसका मतलब उस जीव के आवास, भोजन, प्रजनन, व्यवहार और पर्यावरणीय भूमिका को समझने का एक नया अवसर होता है। चार सेंटीमीटर से भी छोटे इस मेंढक का अध्ययन यह जानने में मदद कर सकता है कि वह अपने पारिस्थितिकी तंत्र में किस भूमिका को निभाता है। साथ ही, इसकी रात में सक्रिय रहने की आदत वैज्ञानिकों को निशाचर उभयचरों के व्यवहार को समझने में भी उपयोगी जानकारी दे सकती है।

मेंढकों को पर्यावरण की सेहत का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। उनकी त्वचा बेहद संवेदनशील होती है और वे अपने आसपास के वातावरण में होने वाले बदलावों से प्रभावित हो सकते हैं। पानी की गुणवत्ता, तापमान, नमी और जंगलों में होने वाले बदलाव उनके जीवन पर असर डाल सकते हैं। इसलिए ‘कॉफी फ्रॉग’ जैसी नई प्रजाति की पहचान यह याद दिलाती है कि प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना कितना जरूरी है। यदि किसी छोटे क्षेत्र में ही सीमित प्रजाति पाई जाती है, तो उसके आवास में बदलाव उसके अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

कॉफी की झाड़ियों पर बैठकर रात में तेज आवाज निकालने वाला यह नन्हा मेंढक भले ही आकार में छोटा हो, लेकिन इसकी खोज ने वैज्ञानिकों के सामने प्रकृति की एक नई कहानी खोल दी है। ‘कॉफी फ्रॉग’ यह भी बताता है कि धरती के जैव विविधता से भरपूर क्षेत्रों में अभी कितनी अनदेखी दुनिया मौजूद हो सकती है। शायद यही प्रकृति की सबसे बड़ी खूबसूरती है कि कभी किसी विशाल जीव की खोज दुनिया को चौंकाती है, तो कभी चार सेंटीमीटर से भी छोटे जीव की रात में सुनाई देने वाली आवाज वैज्ञानिकों को नई खोज की ओर ले जाती है। कोस्टा रिका का यह नन्हा ‘कॉफी फ्रॉग’ इसी रहस्यमयी प्राकृतिक संसार का एक अनोखा हिस्सा बनकर सामने आया है।

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