देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनेगी। पहली बार यहां से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का गायन किया जाएगा। राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में केंद्र सरकार ने इसकी ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने के लिए विशेष कार्यक्रम की तैयारी की है। इस आयोजन के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति के प्रतीक के रूप में फिर से जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया जाएगा।
‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीयों में राष्ट्रीय भावना और एकजुटता का संचार किया। ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों के बीच यह गीत प्रेरणा का स्रोत बना। समय के साथ ‘वंदे मातरम’ देश की राष्ट्रीय चेतना का अभिन्न हिस्सा बन गया। इसकी 150वीं वर्षगांठ का आयोजन इसी गौरवशाली विरासत को याद करने और नई पीढ़ी को इसके ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराने का अवसर है।
सूत्रों के अनुसार रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने सोमवार को बताया कि राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसकी यादगार विरासत के सम्मान में इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लालकिले की प्राचीर से इसका गायन कराया जाएगा। लालकिला स्वयं भारत की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक यात्रा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। हर वर्ष 15 अगस्त को प्रधानमंत्री इसी ऐतिहासिक स्थल की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हैं। ऐसे में इसी मंच से ‘वंदे मातरम’ का विशेष गायन इस आयोजन को और भी ऐतिहासिक बना देगा।
स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस बार भारतीय वायुसेना की भी विशेष भागीदारी रहेगी। भारतीय वायुसेना का एमआई-17 हेलीकॉप्टर ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक विशेष बैनर लेकर लालकिले के ऊपर से उड़ान भरेगा। हेलीकॉप्टर के माध्यम से समारोह में मौजूद लोगों पर फूलों की वर्षा भी की जाएगी। आसमान में उड़ता हेलीकॉप्टर, हाथों में तिरंगा और वातावरण में गूंजता ‘वंदे मातरम’ स्वतंत्रता दिवस समारोह के दृश्य को बेहद भावपूर्ण और यादगार बनाने वाला होगा।
‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ केवल एक समारोह तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य देश की युवा पीढ़ी को इस गीत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से जोड़ना भी है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत ने जिस प्रकार लोगों में राष्ट्रीय चेतना जगाई, उसी भावना को आज के भारत में नई ऊर्जा देने की कोशिश की जा रही है। आजादी के अमृत काल के बाद भारत अपनी स्वतंत्रता यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ावों को याद कर रहा है। ऐसे समय में स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों और प्रतीकों को नए संदर्भ में सामने लाना देश की ऐतिहासिक चेतना को मजबूत करने का माध्यम बन सकता है।
15 अगस्त का दिन हर भारतीय के लिए गौरव और भावनाओं से भरा होता है। लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का संबोधन, तिरंगे का फहराना और देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम स्वतंत्रता दिवस की पहचान हैं। इस बार ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का अवसर समारोह को एक अतिरिक्त ऐतिहासिक आयाम देगा। लालकिले की प्राचीर से पहली बार ‘वंदे मातरम’ का गायन और उसके बाद भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर की पुष्पवर्षा देश की स्वतंत्रता, संघर्ष और राष्ट्रीय एकता की भावना को एक साथ अभिव्यक्त करेगी।
यह आयोजन न केवल 150 वर्ष पुरानी एक अमर रचना को सम्मान देगा, बल्कि यह भी याद दिलाएगा कि स्वतंत्रता केवल इतिहास का अध्याय नहीं है, बल्कि उन मूल्यों और भावनाओं की निरंतर यात्रा है, जिन्होंने भारत को एक राष्ट्र के रूप में मजबूत बनाया।

