अब 1601 से आएगा जरूरी फोन, फर्जी कॉल पर लगेगा ब्रेक

Jitendra Kumar Sinha
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मोबाइल फोन पर आने वाली अनजान कॉलों के बीच अब यह पहचानना आसान हो सकता है कि फोन किसी उपयोगिता या लॉजिस्टिक सेवा देने वाली कंपनी की ओर से आया है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने बिजली, पानी, गैस, कूरियर और लॉजिस्टिक जैसी सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के लिए अलग ‘1601’ नंबर सीरीज अनिवार्य करने का फैसला किया है। इस सीरीज का इस्तेमाल केवल सेवा और लेनदेन से संबंधित कॉल के लिए किया जाएगा। इसका उपयोग प्रचार या विज्ञापन संबंधी कॉल करने के लिए नहीं किया जा सकेगा।


मोबाइल उपयोगकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें अक्सर सामान्य 10 अंकों वाले मोबाइल नंबरों से ऐसे फोन आते हैं, जिनमें बैंक, बिजली विभाग, गैस कंपनी, कूरियर सेवा या किसी अन्य प्रतिष्ठित संस्था का कर्मचारी बनकर जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है। कई मामलों में लोगों को ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी या अन्य संवेदनशील विवरण साझा करने के लिए मजबूर किया जाता है।


ऐसे फर्जी फोन के कारण साइबर ठगी के मामले लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। ट्राई की नई व्यवस्था का उद्देश्य इसी तरह की धोखाधड़ी को कम करना है। यदि उपभोक्ता को पता होगा कि किसी उपयोगिता या लॉजिस्टिक कंपनी की वास्तविक सेवा संबंधी कॉल एक निर्धारित नंबर सीरीज से आ रही है, तो उसके लिए संदिग्ध कॉल की पहचान करना अपेक्षाकृत आसान होगा।


नई नंबर सीरीज की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि 1601 का इस्तेमाल केवल सेवा और लेनदेन संबंधी संचार के लिए किया जाएगा। इसका इस्तेमाल कंपनियां अपने उत्पादों या सेवाओं के प्रचार के लिए नहीं कर सकेगी। बिजली बिल से संबंधित सूचना, पानी या गैस कनेक्शन से जुड़ी जानकारी, डिलीवरी की स्थिति, कूरियर की जानकारी, लॉजिस्टिक सेवा से संबंधित अपडेट अथवा किसी लेनदेन की पुष्टि जैसी जरूरतों के लिए आने वाली कॉल इस व्यवस्था के दायरे में होगी। इससे उपभोक्ताओं के लिए यह समझना आसान हो सकता है कि फोन का उद्देश्य वास्तविक सेवा देना है या फिर किसी तरह का प्रचार अथवा संदिग्ध गतिविधि।


डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ मोबाइल फोन अब बैंकिंग, खरीदारी, बिल भुगतान, यात्रा, डिलीवरी और तमाम दूसरी सेवाओं का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में फोन के जरिए होने वाली ठगी के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। ठग कभी बिजली बिल बकाया होने का दावा करते हैं, तो कभी गैस कनेक्शन बंद होने की बात कहकर उपभोक्ता को डराते हैं। इसी तरह कूरियर या पार्सल के नाम पर भी लोगों से संपर्क किया जाता है। कई बार फोन करने वाला व्यक्ति खुद को किसी प्रतिष्ठित कंपनी का अधिकारी बताकर विश्वास हासिल करने की कोशिश करता है। ऐसी स्थिति में एक अलग नंबर सीरीज उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कवच का काम कर सकती है।


ट्राई की पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य दूरसंचार व्यवस्था में विश्वास और पारदर्शिता बढ़ाना भी है। अलग नंबर सीरीज होने से उपभोक्ता यह समझ सकेगा कि सामने से आने वाली कॉल किस श्रेणी की सेवा से संबंधित हो सकती है। हालांकि, केवल नंबर देखकर ही किसी कॉल को पूरी तरह सुरक्षित मान लेना उचित नहीं होगा। उपभोक्ताओं को किसी भी फोन पर अपना ओटीपी, पासवर्ड, बैंकिंग पिन या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। संदिग्ध स्थिति में संबंधित कंपनी के आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करना बेहतर होगा।


नई व्यवस्था लागू होने के साथ संबंधित कंपनियों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। उन्हें सेवा संबंधी कॉल के लिए निर्धारित नंबर सीरीज का इस्तेमाल करना होगा और प्रचारात्मक संचार के लिए इसका दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा। इससे दूरसंचार नेटवर्क पर आने वाले व्यावसायिक कॉल को अलग-अलग श्रेणियों में पहचानने में भी मदद मिल सकती है। साथ ही, शिकायतों और संदिग्ध कॉल की निगरानी के लिए नियामकीय व्यवस्था को मजबूत करने में यह कदम उपयोगी साबित हो सकता है।


1601 नंबर सीरीज की व्यवस्था निश्चित रूप से फोन आधारित धोखाधड़ी को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन साइबर ठगी पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए तकनीकी व्यवस्था के साथ उपभोक्ता जागरूकता भी जरूरी है। उपभोक्ताओं को यह समझना होगा कि कोई भी वास्तविक सेवा प्रदाता अनावश्यक रूप से बैंकिंग पासवर्ड, ओटीपी या गोपनीय जानकारी नहीं मांगता। आने वाले समय में यदि 1601 सीरीज को लेकर लोगों में पर्याप्त जागरूकता पैदा होती है, तो बिजली, पानी, गैस, कूरियर और लॉजिस्टिक सेवाओं के नाम पर होने वाली फर्जी कॉल और ठगी के मामलों पर अंकुश लगाने में यह व्यवस्था प्रभावी साबित हो सकती है।


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