दर्द से बेखबर रहने वाला धरती का जीव है - “नेकेड मोल रैट”

Jitendra Kumar Sinha
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प्रकृति की दुनिया रहस्यों और अद्भुत क्षमताओं से भरी हुई है। धरती पर ऐसे अनेक जीव पाए जाते हैं, जिनकी शारीरिक संरचना और जीवनशैली वैज्ञानिकों को हैरान करती है। नेकेड मोल रैट (Naked Mole Rat) भी ऐसा ही एक असाधारण स्तनधारी है। देखने में यह छोटा, झुर्रीदार और लगभग बालरहित जीव भले ही आकर्षक न लगे, लेकिन इसकी जैविक क्षमताएं इसे वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बना देती हैं। सबसे खास बात यह है कि तेज जलन पैदा करने वाली परिस्थितियों में भी यह जीव सामान्य रूप से व्यवहार कर सकता है। इसी असाधारण क्षमता ने इसे दर्द और तंत्रिका-विज्ञान के शोध का महत्वपूर्ण विषय बना दिया है।


नेकेड मोल रैट की सबसे चर्चित विशेषताओं में से एक है कि कुछ प्रकार के दर्द और जलन के प्रति इसकी असामान्य सहनशीलता। वैज्ञानिकों ने पाया है कि कुछ ऐसे रासायनिक उत्तेजकों के प्रति, जो दूसरे स्तनधारियों में तेज दर्द या जलन पैदा कर सकते हैं, नेकेड मोल रैट की प्रतिक्रिया काफी अलग होती है। इसके शरीर में दर्द महसूस करने और तंत्रिका संकेतों को संसाधित करने की प्रक्रिया में कुछ विशिष्ट जैविक अंतर पाए गए हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक इस जीव का अध्ययन यह समझने के लिए करते हैं कि दर्द की अनुभूति को शरीर किस प्रकार नियंत्रित करता है।


दर्द से जुड़ी इसकी अनोखी क्षमता चिकित्सा विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण संभावना प्रस्तुत करती है। शोधकर्ता यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि नेकेड मोल रैट की तंत्रिका प्रणाली में कौन-से आणविक और जैविक तंत्र दर्द की अनुभूति को कम करते हैं। यदि इन प्रक्रियाओं को पूरी तरह समझ लिया जाए, तो भविष्य में ऐसी दर्द निवारक दवाएं विकसित करने में मदद मिल सकती है, जो प्रभावी होने के साथ-साथ मौजूदा दवाओं की कुछ सीमाओं को भी कम कर सकें। हालांकि, इस दिशा में शोध अभी जारी है और नेकेड मोल रैट से सीधे किसी नई दवा का तैयार होना निश्चित नहीं माना जा सकता।


नेकेड मोल रैट का जीवन जमीन के नीचे बनी लंबी सुरंगों में गुजरता है। यह अकेले रहने के बजाय बड़े समूहों में रहना पसंद करता है। इसकी सामाजिक व्यवस्था भी बेहद असाधारण है। इसका सामाजिक संगठन कुछ हद तक मधुमक्खियों और चींटियों जैसी सामूहिक व्यवस्था की याद दिलाता है। समूह में अलग-अलग सदस्यों की भूमिकाएं होती हैं और वे मिलकर भोजन जुटाने, सुरंगों का निर्माण करने तथा समूह की सुरक्षा जैसे कार्य करते हैं।


नेकेड मोल रैट को वैज्ञानिकों ने सामाजिक संगठन के लिहाज से विशेष महत्व दिया है, क्योंकि यह उन दुर्लभ स्तनधारियों में शामिल है जिनमें अत्यंत संगठित सामूहिक जीवन देखने को मिलता है। एक समूह में प्रजनन करने वाली मादा और नर की भूमिका अलग हो सकती है, जबकि बड़ी संख्या में सदस्य सुरंग बनाने, भोजन खोजने और कॉलोनी की देखभाल जैसे काम करते हैं। इस प्रकार पूरा समूह एक संगठित इकाई की तरह काम करता है।


नेकेड मोल रैट की एक और अद्भुत क्षमता उसके भूमिगत जीवन से जुड़ी है। इसकी सुरंगों में ऑक्सीजन का स्तर कई बार कम हो सकता है। ऐसे वातावरण में भी यह जीव जीवित रह सकता है और सामान्य गतिविधियां जारी रख सकता है। इसके शरीर में ऑक्सीजन की कमी से निपटने के लिए विशेष अनुकूलन विकसित हुए हैं। यही विशेषता वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर सकती है कि शरीर कम ऑक्सीजन वाली परिस्थितियों में किस प्रकार खुद को अनुकूलित करता है।


नेकेड मोल रैट आकार में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके भीतर छिपे जैविक रहस्य विज्ञान के लिए बहुत बड़े हैं। दर्द की अनुभूति, कम ऑक्सीजन में जीवन, सामूहिक सामाजिक व्यवस्था और भूमिगत वातावरण के अनुकूलन जैसी खूबियां इसे अन्य स्तनधारियों से अलग बनाती हैं। आज यह जीव केवल भूमिगत सुरंगों में रहने वाला एक विचित्र प्राणी नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान की दुनिया में एक महत्वपूर्ण मॉडल बन चुका है।


नेकेड मोल रैट हमें यह याद दिलाता है कि प्रकृति ने जीव-जगत में ऐसे समाधान विकसित किए हैं, जिन्हें मनुष्य अभी पूरी तरह समझ भी नहीं पाया है। दर्द और ऑक्सीजन की कमी जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने की इसकी क्षमता भविष्य के वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए नई दिशाएं खोल सकती है। इसलिए नेकेड मोल रैट केवल एक अनोखा जीव नहीं, बल्कि प्रकृति की चलती-फिरती प्रयोगशाला है, जिसके अध्ययन से आने वाले समय में दर्द प्रबंधन और मानव स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण रहस्यों पर नई रोशनी पड़ सकती है।


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