सभी सरकारी स्कूल के छतों पर लगेंगे सौर ऊर्जा संयंत्र

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार में सरकारी स्कूलों को अब स्वच्छ और किफायती ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य के सरकारी विद्यालयों की छतों पर ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य स्कूलों में बिजली की जरूरत को सौर ऊर्जा के माध्यम से पूरा करने के साथ-साथ अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देना और विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने इस दिशा में प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।



बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने सरकारी विद्यालय भवनों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना को वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। विद्यालयों की उपलब्ध छत, बिजली की जरूरत और अन्य तकनीकी पहलुओं का आकलन कर संयंत्र लगाने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक धर्मेंद्र कुमार ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को पत्र जारी किया है। अधिकारियों को योजना के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।



रूफटॉप सोलर प्लांट लगने के बाद सरकारी स्कूल अपनी बिजली जरूरत के एक बड़े हिस्से को सौर ऊर्जा से पूरा कर सकेंगे। इससे विद्यालयों में पंखे, लाइट, कंप्यूटर, स्मार्ट क्लास, प्रोजेक्टर और अन्य विद्युत उपकरणों के संचालन में मदद मिलेगी। ग्रिड से जुड़े सौर संयंत्रों की खासियत यह है कि वे स्कूल की बिजली व्यवस्था को ग्रिड से जोड़कर काम करते हैं। इससे विद्यालयों को बिजली की उपलब्धता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। सौर ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल से भविष्य में बिजली खर्च को नियंत्रित करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।



सरकारी स्कूलों की बड़ी संख्या को देखते हुए इस योजना का प्रभाव व्यापक हो सकता है। यदि अधिक संख्या में विद्यालय सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करने लगते हैं, तो पारंपरिक बिजली पर उनकी निर्भरता कम होगी। इससे सरकारी स्तर पर बिजली खर्च में भी बचत की संभावना है। इसके साथ ही सौर ऊर्जा प्रदूषण रहित ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। कोयला और अन्य पारंपरिक ईंधनों से बनने वाली बिजली की तुलना में सौर ऊर्जा पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल मानी जाती है। स्कूलों में सोलर प्लांट लगने से बच्चों को अक्षय ऊर्जा के व्यावहारिक उपयोग को समझने का अवसर भी मिलेगा।



सौर ऊर्जा संयंत्र केवल बिजली पैदा करने का माध्यम नहीं होंगे, बल्कि विद्यार्थियों के लिए सीखने का एक व्यावहारिक साधन भी बन सकते हैं। बच्चे स्कूल की छत पर लगे सोलर पैनल देखकर यह समझ सकेंगे कि सूर्य की रोशनी से बिजली कैसे पैदा होती है और उसका इस्तेमाल किस प्रकार किया जाता है। विज्ञान विषय की पढ़ाई में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। शिक्षक सौर ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण जैसे विषयों को स्कूल में लगे वास्तविक संयंत्र के उदाहरण से समझा सकते हैं। इस तरह स्कूल स्वयं विद्यार्थियों के लिए अक्षय ऊर्जा की प्रयोगशाला बन सकते हैं।



सरकारी विद्यालयों में रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने की पहल बिहार को हरित ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ाने वाली योजना के रूप में देखी जा रही है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के विद्यालय इससे लाभान्वित हो सकते हैं। खासकर ऐसे स्कूल जहां बिजली की खपत अधिक है, वहां सौर ऊर्जा व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है। योजना को सफल बनाने के लिए संयंत्रों की गुणवत्ता, नियमित रखरखाव, सुरक्षा व्यवस्था और बिजली ग्रिड से उचित कनेक्शन पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा। सोलर पैनलों की समय-समय पर सफाई और तकनीकी जांच भी आवश्यक होगी।



सरकारी स्कूलों की छतों पर सोलर प्लांट लगाने से ऊर्जा संरक्षण का संदेश केवल विद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। विद्यार्थी अपने घर और समाज में भी सौर ऊर्जा तथा बिजली बचत के महत्व की जानकारी पहुंचा सकते हैं। इस प्रकार यह योजना बिजली बचत, सरकारी खर्च में कमी, पर्यावरण संरक्षण और विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने, चारों स्तरों पर प्रभाव डाल सकती है। वर्ष 2029-30 तक योजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में बिहार के सरकारी स्कूल न केवल शिक्षा के केंद्र, बल्कि हरित और स्वच्छ ऊर्जा के मॉडल केंद्र के रूप में भी पहचान बना सकते हैं।


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