जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले के बाद सुरक्षा बलों ने व्यापक कार्रवाई करते हुए पूरे कश्मीर क्षेत्र से लगभग 1,500 लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें से अधिकांश 'ओवरग्राउंड वर्कर्स' (OGWs) हैं, जिन पर आतंकवादी संगठनों के लिए सहायता प्रदान करने का संदेह है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक चल रही थी, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित कई शीर्ष अधिकारी शामिल थे।
हमले में 28 पर्यटकों की मौत हुई थी, जिसमें विदेशी नागरिक भी शामिल थे। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) के आतंकवादियों ने बैसरन घाटी में पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इसके बाद सुरक्षा बलों ने दक्षिण कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान तेज कर दिए हैं, जिसमें उरी नाला में नियंत्रण रेखा (LOC) पर घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया गया और कुलगाम तथा तंगीमार्ग में अभियान शुरू किए गए हैं।
इंटेलिजेंस इनपुट्स के अनुसार, नियंत्रण रेखा के पार 42 आतंकी लॉन्चपैड सक्रिय हैं, जिनमें लगभग 110 से 130 आतंकवादी मौजूद हैं। इनमें से 10 लॉन्चपैड कश्मीर के अपोजिट सेक्टरों में और 32 SPPR रीजन के अपोजिट हैं।
इस हमले के बाद से कश्मीर घाटी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और आतंकवादियों तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी।
