सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब जल कूटनीति की मार

Jitendra Kumar Sinha
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में लिए गए निर्णयों के तहत भारत ने 1960 में पाकिस्तान के साथ हुई सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही भारत में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया गया है।

हमले की पृष्ठभूमि

21 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की मौत हो गई थी। इस हमले की जिम्मेदारी 'कश्मीर रेजिस्टेंस' नामक एक नए आतंकी संगठन ने ली है, जिसने इसे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ प्रतिरोध बताया है। हमले के बाद से ही भारत में पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही थी।

सिंधु जल संधि का निलंबन

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि के तहत भारत को पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) और पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) के जल उपयोग का अधिकार मिला था। इस संधि को अब तक दोनों देशों ने युद्धकाल में भी निभाया था। हालांकि, भारत ने अब इसे निलंबित कर पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है कि आतंकवाद के समर्थन की कीमत चुकानी होगी। 


पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश

भारत में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया गया है। इसके तहत सभी पाकिस्तानी नागरिकों को अपने-अपने दूतावास से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

अन्य कड़े कदम

भारत सरकार ने निम्नलिखित कदम भी उठाए हैं:

  • अटारी-वाघा बॉर्डर को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। 

  • पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा और अन्य दस्तावेज तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए गए हैं।

  • पाकिस्तान के साथ सभी द्विपक्षीय व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों की समीक्षा की जा रही है।


सरकार का सख्त रुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है।"​


पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान ने भारत के इन कदमों को "अत्यधिक प्रतिक्रिया" बताया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है। हालांकि, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि यह उसके आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता का मामला है।​

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