बिहार को ऊर्जा का महासंचार: प्रधानमंत्री ने दी ₹6204.65 करोड़ की विद्युत परियोजनाओं की सौगात

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार की धरती ने 24 अप्रैल 2025 को ऊर्जा क्षेत्र में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मधुबनी जिले से 6204.65 करोड़ रुपए की विद्युत परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। यह दिन राज्य के विकास यात्रा में एक मील का पत्थर साबित हुआ। इन परियोजनाओं का उद्देश्य न केवल बिजली आपूर्ति को सुदृढ़ करना है, बल्कि यह राज्य के हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण और सतत ऊर्जा पहुंचाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।


रीवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDS-S) की व्यापक योजना

इस ऐतिहासिक अवसर पर जिन परियोजनाओं की नींव रखी गई, उनमें सबसे प्रमुख है ‘रीवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम’ (RDS-S)। ₹5030.74 करोड़ की लागत वाली इस योजना के तहत राज्य की विद्युत वितरण प्रणाली को आधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा। इसका सीधा असर यह होगा कि राज्य में बिजली की गुणवत्ता बेहतर होगी, ट्रांसमिशन में होने वाले नुकसान कम होंगे और उपभोक्ताओं को लगातार और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।


इस योजना के अंतर्गत स्मार्ट मीटरिंग, लाइन लॉस को कम करने, ग्रिड के आधुनिकीकरण और तकनीकी विकास के साथ वितरण केंद्रों का डिजिटलीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे।


शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा समान लाभ

बिहार के विकास का प्रमुख लक्ष्य है – 'समावेशी विकास'। प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन की गई इन परियोजनाओं की विशेषता यह है कि इनका प्रभाव केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी ऊर्जा क्रांति लाई जाएगी। ₹1173.91 करोड़ की लागत से जो परियोजनाएं शुरू की गई हैं, उनमें 62 गांवों में आवासीय विद्युतीकरण, 59 नए पावर सब-स्टेशन का निर्माण और पटना विद्युत वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने की योजनाएं प्रमुख हैं।


यह योजनाएं बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा देंगी। किसानों को सस्ती और भरोसेमंद बिजली मिलने से सिंचाई की लागत कम होगी, वहीं ग्रामीण उद्योगों को नया प्रोत्साहन मिलेगा।


राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक समर्पण

इस अवसर पर राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, केंद्रीय पंचायती मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, उपमुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी और श्री विजय कुमार सिन्हा जैसे कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य और केंद्र दोनों ही स्तरों पर इस पहल को लेकर गहन प्रतिबद्धता है।


माननीय ऊर्जा मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इसे ‘बिहार की ऊर्जा यात्रा में ऐतिहासिक दिन’ बताया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से राज्य में बिजली ढांचे को मजबूती मिलेगी और हर घर तक भरोसेमंद बिजली पहुंचाने का संकल्प और सुदृढ़ होगा।


प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण: आत्मनिर्भर बिहार की ओर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार में बिजली व्यवस्था को मजबूत करना आत्मनिर्भर भारत अभियान का अहम हिस्सा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सशक्त ऊर्जा व्यवस्था के बिना किसी भी राज्य का औद्योगिक विकास संभव नहीं है। इन परियोजनाओं से बिहार का औद्योगिक परिदृश्य बदलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और निवेशकों का विश्वास भी मजबूत होगा।


भविष्य की रूपरेखा: तकनीकी नवाचार और टिकाऊ विकास

बिजली वितरण प्रणाली को तकनीकी रूप से समृद्ध बनाना इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है। भविष्य में राज्य सरकार और केंद्र मिलकर स्मार्ट ग्रिड, अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने, और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे उपायों को भी लागू करेंगे। इससे न केवल पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों पर निर्भरता घटेगी, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी यह कदम सार्थक सिद्ध होगा।


ऊर्जा से समृद्धि की ओर बढ़ता बिहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बिहार के ऊर्जा क्षेत्र को ₹6204.65 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात देना न केवल एक वित्तीय निवेश है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत पहल है। इन योजनाओं से न केवल वर्तमान की समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए भी एक ठोस आधार तैयार किया जाएगा।


बिहार अब उस मोड़ पर खड़ा है, जहां से वह ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो सकता है – और यह शुरुआत है एक उज्जवल, आत्मनिर्भर और समृद्ध भविष्य की।


"बिजली सिर्फ रोशनी नहीं लाती, वह संभावनाओं की नई किरण बनकर उगती है – और आज बिहार उस नई सुबह का स्वागत कर रहा है।"

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