वैंपायर फिश - खून व शरीर के तरल पदार्थ चूसती है

Jitendra Kumar Sinha
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प्रकृति का विचित्र और प्राचीन जीव है लैम्प्रे, जिसे 'वैंपायर फिश' भी कहा जाता है । यह बिना जबड़े वाली मछली है और दिखने में सांप जैसा लगता है। 'वैंपायर फिश' की लंबाई 15 सेमी से लेकर 1 मीटर तक होता है। लगभग 360 मिलियन वर्ष पुरानी लैम्प्रे को जीवित जीवाश्म माना जाता है, जो समुद्रों, नदियों और झीलों में और अटलांटिक महासागर में पाई जाती है। 



'वैंपायर फिश' का सबसे खास लक्षण होता है इसका गौल मुंह, जिसमें नुकीले दांत और रस्सी जैसी जीभ होती है। 'वैंपायर फिश' (लैम्प्रे) की परजीवी जीवनशैली इसे और अनोखा बनाती है। यह अन्य मछलियों जैसे सैल्मन से चिपककर उनकी त्वचा को कुरेदती है और खून व शरीर के तरल पदार्थ चूसती है। 



'वैंपायर फिश' का शरीर लचीला और हड्डीविहीन होता है जो इसे तेजी से तैरने और तंग जगहों में घुसने में मदद करता है। 'वैंपायर फिश' (लैम्प्रे) का जीवन चक्र भी रोचक है। यह अपने शुरुआती साल लार्वा के रूप में नदी के तल में बिताती है।


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