पोप फ्रांसिस के निधन के बाद वेटिकन में नए पोप के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह प्रक्रिया ‘पोपल कॉन्क्लेव’ कहलाती है, जिसमें कार्डिनल्स गुप्त मतदान के जरिए नए पोप का चयन करते हैं।
पोप चयन की प्रक्रिया कैसे होती है?
जब पोप का पद रिक्त होता है, तब वेटिकन सिटी के सिस्टीन चैपल में कार्डिनल्स एकत्र होते हैं। यहां वे पूरी दुनिया से छिपे एक गुप्त मतदान के माध्यम से नए पोप का चुनाव करते हैं।
यदि किसी उम्मीदवार को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलता है, तो मतपत्रों को जला दिया जाता है और काले धुएं का उठना इस बात का संकेत होता है कि चुनाव अभी नहीं हुआ। जैसे ही कोई उम्मीदवार आवश्यक बहुमत प्राप्त करता है, सफेद धुआं निकलता है — जो दुनिया को यह बताता है कि नया पोप चुन लिया गया है।
भारतीय कार्डिनल्स की भूमिका
भारत में इस समय छह कार्डिनल्स हैं, जिनमें से चार की उम्र 80 वर्ष से कम है और वे नए पोप के चुनाव में मतदान करने के पात्र हैं। ये हैं:
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कार्डिनल फिलिप नेरी फेराओ
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कार्डिनल क्लेमिस बेसिलियोस
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कार्डिनल एंथनी पूला
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कार्डिनल जॉर्ज जैकब कूवाकड
अन्य दो कार्डिनल्स — कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस और कार्डिनल जॉर्ज एलेनचेरी — की उम्र 80 वर्ष से अधिक होने के कारण वे मतदान प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगे।
संभावित नए पोप के दावेदार
दुनियाभर में कुछ नाम ऐसे हैं जो नए पोप के दावेदार के रूप में चर्चा में हैं:
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कार्डिनल पीटर एर्दो (हंगरी): यूरोपीय कार्डिनल्स में इनका प्रभावशाली स्थान है।
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कार्डिनल रेनहार्ड मार्क्स (जर्मनी): वेटिकन में वित्तीय सुधारों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।
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कार्डिनल मार्क ओउलेट (कनाडा): पूर्व में बिशपों के कार्यालय के प्रमुख रह चुके हैं।
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कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन (इटली): वेटिकन की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
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कार्डिनल रॉबर्ट प्रीवोस्ट (अमेरिका): लैटिन अमेरिका में व्यापक अनुभव और वेटिकन में अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
पोप का चयन सिर्फ एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक वैश्विक घटना होती है। यह निर्णय दुनियाभर के करोड़ों कैथोलिक विश्वासियों के भविष्य, नेतृत्व और दिशा को प्रभावित करता है। भारत की भागीदारी इस बार और भी उल्लेखनीय है क्योंकि चार भारतीय कार्डिनल्स इस ऐतिहासिक फैसले का हिस्सा बनने जा रहे हैं।
