मैसूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। इसके बायोमेडिकल रोबोटिक्स विभाग के छात्रों ने एक नया “क्लीनिंग रोबोट” तैयार किया है, जो वर्ष 2026 तक बाजार में उतारा जाएगा। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष श्रीवास्तव का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
सरकार ने इस परियोजना को बढ़ावा देने के लिए 10 लाख रुपये की सहायता राशि दी है। छात्रों ने दिन-रात मेहनत कर इस प्रोडक्ट को साकार किया है, जिसे आईआईटी दिल्ली में हुए एसबीआई ऑडियाथॉन में भी चयनित किया गया था।
सूत्रों के अनुसार, इस क्रांतिकारी रोबोट के निर्माण में एमआईटी के होनहार छात्र गौतम कुमार, दिव्य प्रकाश, छोटू कुमार और विवेक कुमार ने सक्रिय रूप से लगे हुए हैं। इन छात्रों ने अपने ज्ञान, रचनात्मकता और कड़ी मेहनत के बल पर इस प्रोजेक्ट को एक नया मुकाम दिया है।
प्रो. आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, यह क्लीनिंग रोबोट घरेलू और व्यावसायिक दोनों जगहों पर काम करेगा। चाहे वह घर का टॉयलेट हो, किचन हो या फिर किसी बड़े मॉल की सफाई हो, यह रोबोट महज दस मिनट में बड़े-बड़े क्षेत्र को चमका देगा।
एमआईटी प्रशासन की योजना है कि सबसे पहले इस मशीन का ट्रायल संस्थान में ही किया जाएगा और इसके सफल परीक्षण के बाद, इसे बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। खास बात यह है कि इस रोबोट को आम लोगों की पहुँच में रखने के लिए इसकी कीमत भी काफी किफायती रखी जाएगी।
सिर्फ क्लीनिंग रोबोट ही नहीं, एमआईटी के छात्रों ने ऊर्जा संरक्षण की दिशा में भी कदम उठाया हैं। छात्रों ने एक विशेष इलेक्ट्रिक स्विच तैयार किया है जो बिजली की बचत करेगा। यह पहल भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी बड़ी भूमिका निभा सकती है।
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