वैज्ञानिकों ने खोजी - नई प्रजाति के कछुआ

Jitendra Kumar Sinha
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प्रकृति रहस्य समय-समय पर दिखती है। वैसा ही अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने कछुए की एक नई प्रजाति की खोज कर दुनिया को चौंका दिया है। जर्मनी के सेनकेनबर्ग प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के प्रोफेसर डॉ. यूवे फ्रिट्ज और उनकी टीम ने आनुवांशिक विश्लेषण के आधार पर यह खोज की है।

नई खोजी की गई प्रजाति का नाम माता-माता है।यह कछुआ पानी के नीचे कीचड़ में छिपा रहता है और देखने में शैवाल से ढकी चट्टानों जैसा प्रतीत होता है। इनकी औसत लंबाई लगभग 53 सेंटीमीटर तक होती है। माता-माता का शिकार करने का तरीका भी बेहद अनूठा है। जब कोई संभावित शिकार उनके पास आता है, तो ये अचानक अपना बड़ा मुंह खोलकर उसे चूसते हुए निगल लेते हैं। इस विचित्र व्यवहार और अद्भुत छलावरण के बावजूद, अब तक इनकी आनुवांशिक विविधता पर बहुत कम ध्यान दिया गया था।

वैज्ञानिकों का मानना था कि 'जीनस चेलुस' में केवल एक ही प्रजाति मौजूद है, जो पूरे दक्षिण अमेरिका में फैली हुई है। लेकिन डॉ. फ्रिट्ज और उनकी टीम ने इस मान्यता को चुनौती दी। उन्होंने 75 डीएनए नमूनों का विश्लेषण किया और पाया कि वास्तव में माता-माता कछुओं की दो अलग-अलग प्रजातियाँ मौजूद हैं, जिनमें न केवल आनुवांशिक बल्कि शारीरिक विशेषताओं में भी भिन्नता पाई जाती है।

सूत्रों के अनुसार, शोध में दो अलग-अलग प्रजातियों की पहचान की गई है। चेलुस ओरिनोकेन्सिस जो मुख्य रूप से ओरिनोको और रियो नीग्रो बेसिन में पाई जाती है। और दूसरा चेलुस फिर्मब्रआटा जो विशेष रूप से अमेजन बेसिन में निवास करती है।

एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 1 करोड़ 30 लाख साल पहले, मियोसीन काल के दौरान, ये दोनों प्रजातियाँ अलग-अलग विकसित हो गई है। इस अवधि में अमेजन और ओरिनोको नदी घाटियाँ अलग हो गई थीं, जिससे कई जलीय जीवों में प्रजातीय विभाजन शुरू हुआ।

नई खोज के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि माता-माता कछुओं के संरक्षण की स्थिति का पुनर्मूल्यांकन अत्यंत आवश्यक है। पहले इन कछुओं को व्यापक रूप से फैले होने के कारण 'लुप्तप्राय' नहीं माना गया था। लेकिन अब, जब यह ज्ञात हो चुका है कि वास्तव में दो अलग-अलग प्रजातियाँ हैं, तो उनकी जनसंख्या आकार काफी छोटा सिद्ध होता है। इसके अतिरिक्त, माता-माता कछुए अपनी अनूठी बनावट के कारण अवैध पशु व्यापार का भी एक प्रमुख लक्ष्य बन चुके हैं। हर साल हजारों की संख्या में इन विचित्र प्राणियों को पकड़कर अवैध रूप से बाजारों में बेचा जाता है। बोगोटा के नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ कोलम्बिया के प्रोफेसर और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक मारियो वर्गास-रामिरेज कहते हैं कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो इन अद्भुत जीवों के अस्तित्व पर गंभीर संकट आ सकता है।

वैज्ञानिकों ने जोर देकर कहा है कि माता-माता कछुओं की दोनों नई पहचानी गई प्रजातियों के लिए संरक्षण योजनाएँ बनानी होगी। अगर इन कछुओं के आवासों की रक्षा और अवैध व्यापार पर सख्त नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो भविष्य में ये प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर पहुँच सकती हैं।

डॉ. यूवे फ्रिट्ज का कहना है कि "प्राकृतिक विविधता को बचाए रखने के लिए हमें न केवल बड़े और प्रसिद्ध जीवों पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि उन अनजानी और अद्भुत प्रजातियों पर भी ध्यान देना चाहिए, जो पृथ्वी की जैव विविधता को समृद्ध बनाती हैं।"

माता-माता कछुओं की दो नई प्रजातियों की खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमें प्राकृतिक संरक्षण की, हमारी जिम्मेदारियों की भी, याद दिलाती है। यह खोज दर्शाती है कि प्रकृति अब भी रहस्यों से भरी हुई है, जिन्हें समझने और संरक्षित करने के लिए हमें निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

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