ब्रह्मांड की अथाह गहराइयों में एक नई खोज ने वैज्ञानिकों को रोमांचित कर दिया है। कोरिया माइक्रोलेंसिंग टेलीस्कोप नेटवर्क के जरिये खगोलविदों ने पाया है कि सुपर-अर्थ जैसे ग्रह ब्रह्मांड में पहले सोचे गए अनुमान से कहीं अधिक सामान्य है।
यह खोज उन ग्रहों पर भी रोशनी डालती है जो अपने तारे से बहुत दूर, बृहस्पति जैसे लंबे परिक्रमा पथ पर घूमते हैं। गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से प्रकाश को मोड़कर संकेत देती है।
माइक्रोलेंसिंग से वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि हर तीन तारों में कम से कम एक सुपर-अर्थ हो सकती है यानि जीवन के लिए उपयुक्त परिस्थितियां ब्रह्मांड में कहीं अधिक आम हो सकती है।
सुपर-अर्थ ऐसे ग्रह कहे जाते हैं जो पृथ्वी से बड़े, लेकिन गैस दिग्गजों (जैसे बृहस्पति या शनि) से छोटे हो सकते हैं। इन ग्रहों का द्रव्यमान पृथ्वी से 1.5 से 10 गुना तक हो सकता है।
सुपर-अर्थ में ठोस सतह या गैसीय वातावरण हो सकता है और इनमें जीवन के लिए संभावित स्थितियां भी हो सकती हैं।
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