पीएमसीएच में भी अब होगा “कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी”

Jitendra Kumar Sinha
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पटना के सबसे पुराना और प्रतिष्ठित अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में अब बधिर बच्चों के लिए कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी की सुविधा उपलब्ध होने जा रही है। एम्स पटना और इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) की तरह ही अब यह अत्याधुनिक सुविधा पीएमसीएच में भी शुरू होगी, जिससे राज्य भर के जरूरतमंद बच्चों को एक नई जिन्दगी मिल सकेगी।

पीएमसीएच में हाल ही में शुरू हुई नयी बिल्डिंग के संचालन के बाद यह सुविधा शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है और अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस सर्जरी की शुरुआत कर दी जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए पीएमसीएच को एम्स पटना और आईजीआईएमएस से तकनीकी एवं चिकित्सीय सहयोग मिलेगा। दोनों संस्थानों के विशेषज्ञ डॉक्टर पीएमसीएच की टीम को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देंगे। इसके लिए जल्द ही तीनों संस्थानों के बीच एमओयू (सहमति पत्र) पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है।

इस पहल के तहत बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने यह भी निर्णय लिया है कि गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी के लिए आर्थिक सहायता दिया जायेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सिर्फ आर्थिक कारणों से कोई बच्चा इस महत्वपूर्ण उपचार से वंचित न रह जाए।

कोक्लियर इंप्लांट एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है जिसे सुनने में अक्षम बच्चों के कान में लगाया जाता है। यह कान की भीतरी संरचना से जुड़कर ध्वनि को विद्युत संकेत में बदलता है और सीधे श्रवण तंत्रिका (auditory nerve) को उत्तेजित करता है, जिससे बधिर बच्चा सुनने में सक्षम हो जाता है। यह सर्जरी उन बच्चों को किया जाता है जो जन्म से या किसी बीमारी के कारण पूरी तरह से सुनने की क्षमता खो चुका होता है।

पीएमसीएच में कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी की शुरुआत न केवल मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह सामाजिक संवेदनशीलता का भी प्रतीक है। इससे बिहार के हजारों बच्चों और उनके परिवारों को नयी आशा मिलेगी और वे सामान्य जीवन जीने की ओर कदम बढ़ा सकेंगे।
कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी की सुविधा का विस्तार पटना के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। पीएमसीएच में इस सुविधा के शुरू होने से बिहार के सुदूर क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को बेहतर और सुलभ इलाज मिल सकेगा। यह पहल न सिर्फ मेडिकल तकनीक का विस्तार है, बल्कि एक संवेदनशील और समावेशी समाज की ओर बढ़ता मजबूत कदम भी है।



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