कांच की बोतलों में भी प्लास्टिक

Jitendra Kumar Sinha
0




जब भी स्वस्थ जीवनशैली की बात करते हैं, तो स्वाभाविक रूप से मन में यह विश्वास होता है कि कांच की बोतलों में भरा पेय अधिक सुरक्षित होता है। लेकिन एक चौंकाने वाला शोध इस धारणा को झुठला रहा है। हाल ही में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि कांच की बोतलों में मिलने वाले पेय पदार्थों में प्लास्टिक की सूक्ष्म कण यानि माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा, प्लास्टिक बोतलों और मेटल के कैन की तुलना में कहीं ज्यादा पाई गई है।

यह शोध जर्नल ऑफ फूड कंपोजिशन एंड एनालिसिस में प्रकाशित हुआ है। इसमें नींबू पानी, सोडा, और अन्य शीतल पेयों की जांच की गई, जो कांच की बोतलों में पैक होकर बाजार में बिकते हैं। शोधकर्ताओं ने अत्याधुनिक विश्लेषण तकनीकों की मदद से पेयों में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा मापी और पाया कि कांच की बोतलों में इनकी संख्या कहीं अधिक थी। यह परिणाम उपभोक्ताओं के लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि लंबे समय तक माइक्रोप्लास्टिक का सेवन शरीर में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि कांच की बोतलों में प्लास्टिक की मात्रा का स्रोत बॉटल के ढक्कन, सीलिंग मटेरियल, और उत्पादन प्रक्रिया में प्रयुक्त प्लास्टिक से हो सकता है। इसके अलावा, बोतल धोने और पैकिंग के दौरान भी माइक्रोप्लास्टिक कण पेय में मिल सकते हैं। यह भी देखा गया है कि पेय पदार्थ की प्रकृति (गैसीय, अम्लीय आदि) माइक्रोप्लास्टिक के रिसाव को और अधिक बढ़ा सकता है।

माइक्रोप्लास्टिक कण बहुत छोटा होता हैं, जो आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकता हैं। यह कण पाचन तंत्र से होते हुए रक्तप्रवाह तक पहुंच सकता हैं और कोशिकाओं में सूजन, हार्मोन असंतुलन, और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता हैं। बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है।

इस शोध के प्रकाश में आने के बाद उपभोक्ताओं को अपनी पेय आदतों को लेकर सतर्क होने की जरूरत है। चाहे वह कांच की बोतल हो या प्लास्टिक की, किसी भी पैक्ड ड्रिंक के बजाय घर पर तैयार ताजे पेय अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता हैं। इसके साथ ही, खाद्य नियामक एजेंसियों को भी पैकेजिंग के नए मानक तैयार करने की जरूरत है ताकि प्लास्टिक संदूषण को कम किया जा सके। कांच की पारदर्शिता ने हमें वर्षों तक धोखे में रखा है। अब समय आ गया है कि हम पेय की गुणवत्ता को उसकी बोतल की चमक से नहीं, बल्कि उसके निर्माण और पैकिंग प्रक्रिया से जांचें। यह शोध न केवल हमारी आंखें खोलता है, बल्कि हमें हमारी खाद्य सुरक्षा नीतियों को दोबारा सोचने पर मजबूर करता है।



एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top