जहां प्रशासन और जनप्रतिनिधि आंख मूंदे बैठे हैं, वहां ग्रामीणों ने एक मिसाल पेश किया है। फुलवारीशरीफ प्रखंड के लंका कछुआरा पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या 14, माया भवन रोड पर वर्षों से जमी नाले की गंदगी और जलजमाव के बीच ग्रामीणों ने खुद अपनी राह बनाई है। इस इलाके में नाले का गंदा पानी सड़कों पर बहता आ रहा था, जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को भारी कठिनाई होती थी। सड़क कीचड़ में तब्दील हो गई थी, जिससे पैदल चलना तक दूभर हो गया था। हालात इतना बदतर हो गया था कि वाहन चालकों को दूसरे रास्ते तलाशने पड़ते थे। कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक उपेक्षा के कारण आम लोगों को फिर खुद ही आगे आना पड़ा।
स्थानीय निवासियों ने आपसी सहयोग से आर्थिक अंशदान जुटाया और स्वयं ही सड़क पर रोड़ा व छाई डालकर रास्ता दुरुस्त कर दिया। किसी ने मजदूरी की, किसी ने पैसे दिए, किसी ने अपने संसाधन दिए और कुछ लोगों ने दिन-रात मेहनत कर राह सुगम बनाई। यह दृश्य दर्शाता है कि अगर जनता ठान ले तो असंभव कुछ भी नहीं।
ग्रामीणों की यह पहल जहां सराहनीय है, वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर सवाल भी खड़ा होता है। आखिर वर्षों से इस समस्या को नजरअंदाज क्यों किया गया? क्या जनप्रतिनिधियों का काम केवल चुनाव के समय दिखना भर है? स्थानीय लोगों ने बताया है कि वे कई बार पंचायत प्रतिनिधि, वार्ड सदस्य और नगर परिषद तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन किसी ने नाले की मरम्मत या सड़क निर्माण को प्राथमिकता नहीं दिया है।
फिलहाल ग्रामीणों की मेहनत से अस्थायी समाधान तो मिल गया है, लेकिन स्थायी समाधान तभी होगा जब नाले की मरम्मत कर समुचित जलनिकासी की व्यवस्था की जाए। इसके लिए सरकार, प्रशासन और प्रतिनिधियों को आगे आना होगा।
