देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने एक अहम सफलता दर्ज किया है। लंबे समय से आर्थिक धोखाधड़ी के मामले में वांछित चल रहे भगोड़े पवन जैन को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत लाया गया है। सीबीआई की इंटरनेशनल पुलिस कोऑपरेशन यूनिट ने अबू धाबी स्थित इंटरपोल की राष्ट्रीय सेंट्रल ब्यूरो (NCB) की मदद से इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।
पवन जैन के खिलाफ सूरत के अदाजन थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी का गंभीर मामला दर्ज है। उस पर आरोप है कि उसने एक व्यापारिक लेन-देन के बहाने कई लोगों को करोड़ों रुपये की चपत लगाई है और देश छोड़कर फरार हो गया था। भारत में केस दर्ज होने के बाद सीबीआई ने उसे भगोड़ा घोषित कर इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी करवाया था।
सीबीआई की इंटरनेशनल पुलिस कोऑपरेशन यूनिट ने यूएई में पवन जैन की लोकेशन ट्रैक किया। इसके बाद अबू धाबी की NCB के सहयोग से उसे गिरफ्तार किया गया है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे 20 जून, 2025 को अहमदाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लाया गया।
यह गिरफ्तारी भारत और यूएई के बीच मजबूत होते कानूनी और कूटनीतिक संबंधों की मिसाल है। सीबीआई ने इस ऑपरेशन में इंटरपोल के माध्यम से एनसीबी अबू धाबी के अधिकारियों के साथ बेहतरीन तालमेल दिखाया है। इससे पहले भी कई भगोड़े आर्थिक अपराधियों को इंटरपोल की मदद से भारत लाया जा चुका है, लेकिन यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि आरोपी ने विदेश में खुद को छुपाने के लिए कई बार पहचान और लोकेशन बदला था।
पवन जैन को फिलहाल CBI की हिरासत में रखा गया है। उसे सूरत की अदालत में पेश किया जाएगा, जहां उसकी न्यायिक प्रक्रिया शुरू होगी। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी से मामले में और भी आरोपियों की जानकारी मिल सकता है और पीड़ितों को न्याय मिल सकेगा।
भारत सरकार और जांच एजेंसियां अब उन आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा कस रही हैं, जो लंबे समय से विदेश में कानून से बचते फिर रहे थे। पवन जैन की गिरफ्तारी केवल एक आरोपी की वापसी नहीं है, यह भारत की न्यायिक प्रणाली की साख और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती साख का परिचायक है।
