वर्नर सिंड्रोम पर जापान के वैज्ञानिकों ने किया परीक्षण- समय से पहले बुढ़ापा रोकने में कारगर हो सकता है - विटामिन B3

Jitendra Kumar Sinha
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बुढ़ापा एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन जब यह समय से पहले दस्तक दे तो व्यक्ति का जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। ऐसा ही एक दुर्लभ आनुवांशिक विकार है वर्नर सिंड्रोम (Werner Syndrome), जिसमें व्यक्ति किशोरावस्था या युवावस्था में ही बूढ़ा दिखने लगता है। लेकिन हाल ही में जापान के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक क्लीनिकल ट्रायल ने इस स्थिति के इलाज की दिशा में नई उम्मीद जगा दी है।

वर्नर सिंड्रोम एक अनुवांशिक रोग है, जो डीएनए की मरम्मत करने वाले जीन में गड़बड़ी के कारण होता है। इस स्थिति में रोगी 20 वर्ष की आयु में ही बालों का सफेद होना, बाल झड़ना, झुर्रियाँ, मोतियाबिंद, मधुमेह और हृदय संबंधी रोगों का शिकार होने लगता है। इसे प्रोजेरिया का वयस्क रूप भी कहा जाता है। यह स्थिति दुर्लभ होती है, लेकिन इसके प्रभाव बेहद गंभीर होते हैं।

टोक्यो स्थित वैज्ञानिकों की एक टीम ने वर्नर सिंड्रोम के रोगियों पर विटामिन B3 के एक विशेष रूप निकोटिनामाइड राइबोसाइड (NR) का क्लीनिकल ट्रायल किया। यह एक डाइटरी सप्लीमेंट के रूप में दिया गया, जिसे शरीर में एनएडी प्लस (NAD+) नामक अणु का स्तर बढ़ाने के लिए जाना जाता है। NAD+ कोशिकाओं की ऊर्जा उत्पादन और डीएनए की मरम्मत जैसी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस ट्रायल में जिन मरीजों को NR सप्लीमेंट दिया गया, उनमें कई सकारात्मक बदलाव देखे गए। हृदय की कार्यप्रणाली में सुधार, त्वचा के अल्सर में कमी और गुर्दे की क्षति की गति में कमी।  इन परिणामों से पता चलता है कि NR सप्लीमेंट वर्नर सिंड्रोम की प्रगति को धीमा कर सकता है और कुछ लक्षणों को पलट भी सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह उपचार न केवल वर्नर सिंड्रोम बल्कि अन्य आयु-संबंधी रोगों के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

यह परीक्षण, सीमित पैमाने पर किया गया है और इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर अभी और शोध की आवश्यकता है, लेकिन इसके प्रारंभिक परिणाम बेहद उत्साहजनक हैं। जापानी वैज्ञानिकों का यह प्रयास आनुवंशिक बीमारियों के इलाज में विटामिन आधारित हस्तक्षेप की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हो सकता है।

वर्नर सिंड्रोम जैसे दुर्लभ और घातक रोगों के इलाज की खोज में विटामिन B3 की भूमिका एक क्रांतिकारी खोज साबित हो सकता है। यदि भविष्य के ट्रायल भी इस खोज की पुष्टि करता हैं, तो यह उन हजारों मरीजों के लिए आशा की किरण होगी, जो समय से पहले बुढ़ापे की मार झेल रहे हैं। वैज्ञानिकों की यह खोज एक बार फिर यह साबित करता है कि छोटी-छोटी चीजें, जैसे एक विटामिन की गोली, बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकता हैं।



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