ईरान और इज़राइल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल ने एक बार फिर ईरान के इस्फाहान स्थित परमाणु संयंत्र को निशाना बनाया है। यह हमला बेहद खतरनाक रहा और इसमें करीब 400 लोगों की मौत हो गई है। पहले भी इस्फाहान पर 13 जून को हमला हुआ था, और अब इस बार की कार्रवाई में इज़राइली वायुसेना ने छह अलग-अलग लक्ष्यों पर बमबारी की है।
स्थानीय सूत्रों और IAEA रिपोर्टर के अनुसार, इस बार के हमले में यूरेनियम मेटल उत्पादन यूनिट, फ्यूल रॉड यूनिट और संवेदनशील प्रयोगशालाओं को भी तबाह किया गया। इस कार्रवाई में भारी विस्फोटक और ड्रोन हमलों का इस्तेमाल किया गया, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।
मानवाधिकार संगठन HRANA की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 657 लोगों की मौत और 2000 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। जवाबी हमले में इज़राइल में भी 24 लोगों की मौत हुई है। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है और स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।
रूस ने इस घटना पर चिंता जताई है और पुष्टि की है कि बुशहर परमाणु संयंत्र में उनके वैज्ञानिक अभी भी मौजूद हैं और वहां सब कुछ सुरक्षित है। लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर इज़राइल लगातार परमाणु ठिकानों को निशाना बनाता रहा, तो इसके वैश्विक परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
इस हमले में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जॉर्डन ने इज़राइल को सहयोग प्रदान किया। इस संयुक्त कार्रवाई ने ईरानी वायु रक्षा प्रणाली को झकझोर कर रख दिया है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान कभी भी नागरिक ठिकानों को निशाना नहीं बनाएगा, जबकि इज़राइल पर गाजा, अस्पतालों और आम नागरिकों पर हमले करने का आरोप लगाया गया है। वहीं, हिज़्बुल्लाह ने अमेरिका और इज़राइल पर अशांति फैलाने का आरोप लगाते हुए ईरान के साथ खड़े होने की बात कही है।
19 मुस्लिम देशों ने संयुक्त रूप से इज़राइल की कार्रवाई की निंदा की है और संघर्षविराम की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी कहा है कि यह तनाव अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है और इससे क्षेत्रीय स्थिरता को गहरा झटका लग सकता है।
स्थिति तेजी से बिगड़ रही है और अगर यह युद्ध आगे बढ़ता रहा, तो मध्य-पूर्व एक बार फिर बड़ी तबाही की ओर बढ़ सकता है। आने वाले कुछ दिन बेहद निर्णायक होंगे कि शांति की कोई उम्मीद बचती है या हालात और बेकाबू होते हैं।
