21 और 22 जून 2025 की रात अमेरिका ने ईरान के तीन बड़े परमाणु ठिकानों पर जबरदस्त हमला किया। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह हमला "बहुत सफल" रहा और ईरान का फोर्डो परमाणु ठिकाना "पूरी तरह से तबाह" कर दिया गया है।
बताया जा रहा है कि अमेरिका की वायुसेना और नौसेना ने मिलकर फोर्डो, नटांज़ और इस्फहान जैसे हाई-सिक्योरिटी परमाणु ठिकानों को टारगेट किया। इस ऑपरेशन में अमेरिका ने B-2 स्टील्थ बमवर्षकों का इस्तेमाल किया और साथ में 30,000 पाउंड वजनी GBU-57 बंकर बस्टर बमों और टोमहॉक मिसाइलों का भी सहारा लिया।
डोनाल्ड ट्रंप ने बयान में कहा, “यह हमला बिल्कुल सटीक और बहुत ही शानदार रहा। सभी पायलट सुरक्षित लौट आए हैं।” ट्रंप ने यह भी कहा कि “अब शांति का वक्त है,” लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर ईरान दोबारा वार्ता की टेबल पर नहीं आया तो अगला हमला और भी बड़ा होगा।
ईरान की ओर से प्रतिक्रिया में कहा गया है कि इन परमाणु स्थलों से संवेदनशील सामग्री पहले ही हटा ली गई थी, और रेडिएशन का कोई खतरा नहीं है। हालांकि ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह इस हमले का जवाब देगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस हमले की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे "खतरनाक और चिंताजनक" बताया, जबकि इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह “ऐतिहासिक फैसला” था।
वहीं, अमेरिका के कई सांसदों ने ट्रंप पर बिना कांग्रेस की अनुमति के सैन्य कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। डेमोक्रेट नेताओं ने इसे संविधान का उल्लंघन बताया और कहा कि इससे वैश्विक अशांति और बढ़ सकती है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान की ओर से सीधा जवाब कब और कैसे दिया जाएगा, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव की लपटें अब तेज़ हो चुकी हैं। अमेरिका का यह कदम एक बार फिर पूरी दुनिया की निगाहें ईरान और अमेरिका के बीच संभावित युद्ध पर केंद्रित कर चुका है।
