पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर अमेरिका दौरे पर हैं और इसी दौरान वह व्हाइट हाउस में एक आधिकारिक लंच कार्यक्रम में शामिल हुए। इस मुलाकात को अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों के लिहाज से ऐतिहासिक बताया जा रहा है, लेकिन उससे ज्यादा चर्चा में है उनका एक विवादित बयान, जिसने पाकिस्तान के भीतर ही नहीं, पूरी दुनिया में राजनीतिक हलचल मचा दी है।
लंच के दौरान असीम मुनीर ने कहा – “अगर पाकिस्तान में कोई कुत्ता भी प्रधानमंत्री बन जाए, तब भी देश तरक्की कर जाएगा।” यह बात उन्होंने मज़ाक या व्यंग्य के रूप में कही या गुस्से में, यह साफ नहीं हो पाया है, लेकिन इसे सीधे तौर पर पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर बवाल मच गया है और पाकिस्तानी राजनीति में इसका ज़ोरदार विरोध भी हो रहा है।
यही नहीं, असीम मुनीर ने व्हाइट हाउस प्रशासन से खास तौर पर यह सुनिश्चित करने को कहा कि लंच में परोसा गया भोजन ‘हलाल’ हो। इस मांग को लेकर कुछ हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि सेना प्रमुख ने अपनी धार्मिक पहचान और प्रभाव का प्रदर्शन करने की कोशिश की।
यह पहला मौका है जब किसी पाकिस्तानी सेना प्रमुख को व्हाइट हाउस में इस तरह से सम्मानपूर्वक बुलाया गया। आमतौर पर अमेरिका की कूटनीति राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ होती है, न कि सैन्य प्रमुखों के साथ, लेकिन असीम मुनीर की यह भव्य मेज़बानी बताती है कि वॉशिंगटन इस समय पाकिस्तान की सेना को ही असल सत्ता केंद्र मान रहा है।
बयान को लेकर दुनिया भर में प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। भारत में भी इस दौरे और बयान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह न सिर्फ पाकिस्तान के लोकतांत्रिक ढांचे का अपमान है, बल्कि वहां की सेना की वास्तविक भूमिका को भी उजागर करता है। कुछ भारतीय नेताओं ने इसे पाकिस्तान की सैन्य सत्ता का खुला प्रदर्शन बताया है।
मुनीर का यह बयान पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में भी गूंज रहा है। विपक्षी दलों ने सेना प्रमुख की आलोचना करते हुए कहा है कि सेना को इस तरह लोकतंत्र की बेइज्जती नहीं करनी चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यह बयान दर्शाता है कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री पद की हैसियत किस हद तक सेना के अधीन हो चुकी है।
कुल मिलाकर, व्हाइट हाउस का यह लंच डिप्लोमैसी से कहीं ज़्यादा एक राजनीतिक और रणनीतिक संदेश बन गया है—वह भी ऐसे समय में जब पाकिस्तान आंतरिक संकटों, आर्थिक बदहाली और सत्ता संघर्ष से जूझ रहा है।
