आभा सिन्हा, पटना
हिन्दू धर्म में बारह ज्योतिर्लिंग को भगवान शिव के सबसे पवित्र और दिव्य रूपों में माना गया है। यह लिंग उस स्थान को चिह्नित करता हैं जहाँ भगवान शिव ने स्वयं को प्रकाश के रूप में प्रकट किया था। इन 12 स्थानों में से छठा ज्योतिर्लिंग- भीमशंकर है, न केवल पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और अध्यात्म का दुर्लभ समन्वय भी है।
भीमशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र राज्य में स्थित है, जो पुणे से लगभग 100 किलोमीटर उत्तर और मुंबई से लगभग 220 किलोमीटर पूर्व में सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला में अवस्थित है। यह मंदिर भीमा नदी के उद्गम स्थल पर स्थित है, जो कृष्णा नदी की एक सहायक नदी है। चारों ओर से घने जंगलों और पर्वतीय घाटियों से घिरा यह क्षेत्र ‘भीमाशंकर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी’ के नाम से भी प्रसिद्ध है।
भीमशंकर ज्योतिर्लिंग कथा रामायण काल से जुड़ी हुई है। जब भगवान राम ने रावण और उसके भाई कुंभकर्ण का वध किया था, तब कुंभकर्ण के पुत्र भीमा ने यह प्रतिज्ञा लिया था कि वह अपने पिता की मृत्यु का बदला लेगा। वह एक शक्तिशाली राक्षस बन गया और भीमालय नगरी में कठोर तपस्या करके ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया। वरदान के बाद उसने स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में आतंक फैलाना शुरू कर दिया। देवताओं और ऋषियों ने भगवान शिव से रक्षा की प्रार्थना की। एक दिन जब भीमा ने एक शिवभक्त, राजा कामरूपेश्वर को बंदी बना लिया और उसे शिवलिंग की पूजा करने से रोक दिया, तब भगवान शिव ने प्रकट होकर भीमा का वध कर दिया। जिस स्थान पर शिव प्रकट हुए और राक्षस का अंत किया, वहीं भीमशंकर ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई।
शिवपुराण में भीमशंकर का उल्लेख असम के नीलांचल पर्वत (कामाख्या के पास) में भीमशंकर भैरव के रूप में किया गया है। लेकिन महाराष्ट्र का भीमशंकर अधिक लोकप्रिय और प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। इस भौगोलिक अंतर के कारण कुछ विद्वानों का मानना है कि वास्तव में दो भीमशंकर स्थल हैं – एक महाराष्ट्र में और एक असम में। हालांकि ज्यादातर श्रद्धालु महाराष्ट्र स्थित भीमशंकर को ही ज्योतिर्लिंग मानते हैं।
भीमशंकर मंदिर की संरचना प्राचीन नागर शैली की है, जिसमें शिखर ऊंचा और गुम्बदाकार होता है। इस मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में हुआ था, बाद में पेशवाओं ने इसका जीर्णोद्धार और विस्तार कराया। मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग प्राकृतिक पत्थर से बना हुआ है। मंदिर का परिसर विस्तृत है और मुख्य गर्भगृह के अलावा अनेक छोटे-छोटे मंदिर और मूर्तियां हैं, जैसे नंदी, गणेश, पार्वती आदि।
मंदिर के चारों ओर फैला हुआ भीमशंकर वन्यजीव अभयारण्य लगभग 130 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यह क्षेत्र जैवविविधता से भरपूर है। यहां पाए जाने वाले मालाबार जायंट स्क्विरल (शेपकिला) को संरक्षित पशु माना गया है। यह स्थान ट्रेकिंग, बर्ड वॉचिंग और प्राकृतिक प्रेमियों के लिए स्वर्ग के समान है। वर्षा ऋतु में जब पूरा क्षेत्र हरियाली से ढक जाता है, तो मंदिर तक पहुंचने का मार्ग और भी रमणीय हो जाता है।
भीमशंकर न केवल शिवभक्तों के लिए, बल्कि उन साधकों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो जीवन में ध्यान, साधना और आत्मशांति की खोज में होते हैं। शिवरात्रि, श्रावण मास और कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है। माना जाता है कि भीमशंकर में दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो भक्त पूरे श्रद्धा से यहां व्रत और रात्रि जागरण करता है, उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं।
भीमा नदी की उत्पत्ति इसी स्थान से माना जाता है। कहा जाता है कि जब भगवान शिव ने भीमा राक्षस का वध किया था, तब उनके शरीर से उत्पन्न पसीने से यह नदी प्रवाहित हुई। इस नदी को पवित्र माना जाता है और श्रद्धालु इसमें स्नान करके अपने दोषों को शुद्ध करते हैं। श्रावण मास और महाशिवरात्रि पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां भीमशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
भीमशंकर मंदिर के पुजारी कुलकर्णी परिवार से संबंध रखते हैं, जो पीढ़ियों से यहां पूजा कराते आ रहे हैं। यहां के स्थानीय त्योहारों में भीमशंकर यात्रा महोत्सव प्रमुख है, जिसमें भजन, कीर्तन, रथ यात्रा, और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। यह क्षेत्र मराठी संस्कृति और वारकरी संप्रदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो संत तुकाराम और संत ज्ञानेश्वर की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।
भीमशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर में फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। भीमशंकर जंगल में रात में ना ठहरें, विशेषकर मॉनसून में। यदि आप ट्रेकिंग के माध्यम से जाना चाहते हैं, तो स्थानीय गाइड जरूर लें। मंदिर के पास भोजन की सीमित सुविधा है, इसलिए साथ में जरूरी चीजें रखें। भीमशंकर मंदिर के पास स्थानीय ग्रामीण हाट-बाजार लगता है, जहां से। लोग चरणामृत, रुद्राक्ष माला, घंटियां, तांबे के शिवलिंग, और प्राकृतिक शहद आदि खरीदते हैं।
भीमशंकर ज्योतिर्लिंग न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह प्रकृति, आस्था और पौराणिकता का एक अद्भुत संगम है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु इस स्थान की ऊर्जा, शांति और शिवत्व का अनुभव करता है।
