छठ महापर्व के पहले दिन जिसे हम ‘नहाय-खाय’ कहते हैं, इसका शुभ आरंभ आज-आज ही हो गया है। इस दिन व्रती सुबह स्नान करके घर को पूरी तरह पवित्र करते हैं और सिर्फ सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। सिद्धांत यह है कि इस प्रकार स्वयं को तैयार करना ज़रूरी है ताकि आगे आने वाले दिनों में पूरी भक्ति और नियम-कुशलता से व्रत किया जा सके।
घर, पूजा स्थल और रसोई-घर की सफाई इस समय विशेष महत्त्व रखती है। व्रती को प्रातःकाल उठकर स्नान करना अनिवार्य माना गया है — यह सिर्फ शारीरिक स्वच्छता नहीं, बल्कि मन-मानस की शुद्धि का प्रतीक भी है। नए वस्त्र पहनने का विधान है; यदि नए नहीं हों, तो कम-से-कम साफ-सुथरे और पवित्र कपड़े ज़रूर पहनें।
भोजन की तैयारी में पहला कदम है सूर्यदेव को जल अर्पित करना। इसके बाद ही व्रती एवं परिवार का भोजन ग्रहण किया जाना चाहिए। इस दिन मुख्य रूप से लहसुन-प्याज या अन्य तामसिक पदार्थों से परहेज़ किया जाता है। भोजन में कद्दू की सब्जी, लौकी, चने की दाल व भात इस दिन पारंपरिक रूप से शामिल होते हैं।
इस नहाय-खाय दिन का मुख्य उद्देश्य है व्रती को सात्विक भोजन और मानसिक व आध्यात्मिक तैयारी में लाना। इसी से चार दिन तक चलने वाले व्रत-पूजा-आराधना का पथ सुचारु रूप से चलता है, जहाँ संयम, भक्ति और श्रद्धा का प्रमुख स्थान होता है।
इस वर्ष छठ महापर्व २५ अक्टूबर से २८ अक्टूबर २०२५ तक मनाया जा रहा है। पहला दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना पूजन, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य का आयोजन होगा।
अगर आप खुद नहाय-खाय करने वाले हैं तो ध्यान दें — नियम-कुशलता से शुरुआत करें, भोजन में सात्विकता को रखें, और यह समझें कि यह केवल एक भोजन नहीं बल्कि चार-दिनीय पूजा-यात्रा की नींव है। शुभ प्रयोग हो, भक्ति बनी रहे और परिवार में प्रसन्नता और शांति का प्रवाह बढ़े।
