बिहार में 14 से 18 दिसम्बर तक 31 जिलों में चलेगा - “मेगा पल्स पोलियो अभियान”

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार एक बार फिर पोलियो-मुक्त भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में मजबूत कदम उठाने जा रहा है। पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान में वर्ष 2025 में भी पोलियो के नए मामले सामने आने के बाद भारत में सतर्कता और अधिक बढ़ा दी गई है। इसी कड़ी में बिहार सरकार ने 14 से 18 दिसंबर तक राज्य के 31 जिलों में बड़े स्तर पर “पल्स पोलियो अनुराष्ट्रीय टीकाकरण अभियान” चलाने का फैसला लिया है। यह अभियान शून्य से पाँच वर्ष तक के हर बच्चे के स्वास्थ्य सुरक्षा की कवच को और मजबूत करेगा।

विश्व में पोलियो वायरस पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में लगातार नए मामले दर्ज होने से यह स्पष्ट है कि संक्रमण का खतरा अभी भी मौजूद है। सीमावर्ती प्रदेश होने के कारण बिहार के लिए यह खतरा कुछ अधिक संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में, एक भी बच्चा टीकाकरण से छूट जाए, तो भविष्य में जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस अभियान को एक बड़े मिशन के रूप में संचालित कर रहा है।

राज्य के कुल 38 जिलों में से 31 जिलों को इस अभियान में शामिल किया गया है। जो जिला इस अभियान से बाहर रहेंगे, वह है बांका, किशनगंज, मधेपुरा, पूर्णिया, रोहतास, शेखपुरा और शिवहर। इन सात जिलों को छोड़कर शेष सभी जिलों में स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर 0–5 वर्ष के बच्चों को ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) की अतिरिक्त खुराक पिलाएंगे।

इस बार अभियान का विशेष जोर उन इलाकों पर रहेगा, जहाँ अभी भी बच्चों का टीकाकरण अधूरा रह जाता है। इनमें शामिल हैं दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्र, शहरी एव ग्रामीण झुग्गी-झोपड़ी बस्तियाँ, प्रवासी एव भ्रमणशील आबादी, हाइ-रिस्क और घनी आबादी वाले क्षेत्र। स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट लक्ष्य है कि “एक भी बच्चा छूटे नहीं।”

अभियान के दौरान हजारों स्वास्थ्यकर्मी, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका और स्वयंसेवक लगाया जाएगा। बूथ डे के दौरान सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों, स्कूल परिसरों और सार्वजनिक स्थलों पर पोलियो बूथ बनाए जाएंगे। इसके बाद घर-घर जाकर बचे हुए बच्चों को खुराक देने का कार्य जारी रहेगा।

पल्स पोलियो अभियान वर्षों से भारत के सबसे सफल सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक माना जाता है। लेकिन इसकी सफलता में सबसे बड़ी भूमिका माता-पिता की जागरूकता और सहभागिता की होती है। हर माता-पिता को अपने बच्चे को बूथ पर ले जाना चाहिए। अफवाहों से बचना और स्वास्थ्यकर्मियों के निर्देशों का पालन करना चाहिए। यह खुराक पूरी तरह सुरक्षित, प्रभावी और बच्चों के भविष्य के लिये अत्यंत आवश्यक है।

पोलियो जैसे खतरनाक वायरस को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य अभी भी अधूरा है। जब तक दुनिया पोलियो-मुक्त नहीं हो जाती है, भारत को भी सतर्क रहना होगा। बिहार का यह मेगा अभियान आने वाले समय में राज्य और देश को सुरक्षित रखने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा।



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