डाकघरों में ओटीपी से होगी पार्सल की बुकिंग

Jitendra Kumar Sinha
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डाक विभाग ने पार्सल बुकिंग और वितरण प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए एक बड़ा तकनीकी बदलाव लागू किया है। अब डाकघरों में पार्सल बुकिंग ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) के माध्यम से की जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी पार्सल, गलत पहचान और धोखाधड़ी की संभावनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना है। डाक पार्सल निदेशालय के आदेश के बाद यह प्रणाली लागू कर दी गई है।


नई व्यवस्था के तहत जब कोई व्यक्ति डाकघर में पार्सल बुक कराने पहुंचेगा, तो उससे मोबाइल नंबर लिया जाएगा। पार्सल बुकिंग के समय उसी मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाएगा। जब तक यह ओटीपी सत्यापित नहीं होगा, तब तक पार्सल की बुकिंग पूरी नहीं मानी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि पार्सल भेजने वाला व्यक्ति वास्तविक है और उसकी पहचान प्रमाणित है।


सिर्फ बुकिंग ही नहीं, बल्कि पार्सल वितरण के समय भी ओटीपी की व्यवस्था लागू की गई है। पार्सल डिलीवरी से पहले प्राप्तकर्ता के मोबाइल नंबर पर भी ओटीपी भेजा जाएगा। प्राप्तकर्ता द्वारा ओटीपी बताने के बाद ही डाकिया पार्सल सौंपेगा। इस प्रक्रिया से गलत व्यक्ति को पार्सल दिए जाने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।


डाक विभाग के अनुसार, अब तक कई मामलों में फर्जी नाम-पते या गलत पहचान के आधार पर पार्सल बुक किए जाने की शिकायतें मिलती रही हैं। ओटीपी आधारित व्यवस्था से ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगेगी। इससे न केवल डाक विभाग की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।


डाक विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केवल बिहार में ही प्रतिदिन एक लाख से अधिक पार्सल बुक किए जाते हैं। ई-कॉमर्स, ऑनलाइन व्यापार और व्यक्तिगत जरूरतों के चलते पार्सल सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। ऐसे में ओटीपी आधारित प्रणाली जैसे तकनीकी सुधार समय की आवश्यकता बन गया था।


इस नई व्यवस्था से ग्राहकों को कई लाभ मिलेंगे। पार्सल की सुरक्षा बढ़ेगी, गलत डिलीवरी की आशंका कम होगी और पार्सल की ट्रैकिंग अधिक भरोसेमंद बनेगी। साथ ही, किसी भी विवाद की स्थिति में ओटीपी रिकॉर्ड एक मजबूत साक्ष्य के रूप में काम करेगा।


डाकघरों में ओटीपी से पार्सल बुकिंग और वितरण की व्यवस्था डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल डाक सेवाओं को आधुनिक, सुरक्षित और जनविश्वास से भरपूर बनाने में सहायक सिद्ध होगी। आने वाले समय में इस तरह के तकनीकी सुधार डाक विभाग को और अधिक सशक्त बनाएंगे।



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