अपराध, संवेदना और सच्चाई की धुंध है - सिरीज “कोहरा- 2”

Jitendra Kumar Sinha
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2023 में आए पहले सीजन की सफलता के बाद क्राइम थ्रिलर सिरीज ‘कोहरा’ का दूसरा अध्याय दर्शकों के सामने आता है। “कोहरा 2” केवल एक हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि यह पंजाब के ग्रामीण समाज, रिश्तों की जटिलताओं और मानवीय भावनाओं की गहराई में उतरती है। यह सिरीज अपराध की परतों के बीच छिपी सामाजिक सच्चाइयों को उजागर करने का प्रयास करती है।

“कोहरा 2”  की कहानी पंजाब के काल्पनिक शहर दलेरपुरा में घटित होती है। शांत दिखने वाला यह इलाका अचानक उस समय सुर्खियों में आ जाता है, जब एक महिला की हत्या हो जाती है। उसका शव उसके ही भाई के खलिहान में मिलता है, जिससे मामला और भी पेचीदा हो जाता है। हत्या के बाद शक की सुई कई लोगों पर घूमने लगती है- पति, परिवारजन और गांव के कुछ प्रभावशाली चेहरे।

यहीं से कहानी एक साधारण मर्डर मिस्ट्री से आगे बढ़कर रिश्तों, लालच, गुस्से और दबी हुई सच्चाइयों की पड़ताल बन जाती है।

पहले सीजन के बाद कहानी का केंद्र बदलता है। जगराना छोड़कर सहायक सब-इंस्पेक्टर अमरपाल गरुंडी का तबादला दलेरपुरा के पुलिस स्टेशन में हो जाता है। अमरपाल एक संवेदनशील लेकिन दृढ़ पुलिस अफसर हैं, जो नियमों और इंसानियत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं।

यहां उनकी मुलाकात होती है नई कमांडिंग ऑफिसर धनवंत कौर से, जिनकी कार्यशैली सख्त, अनुशासित और बेहद प्रोफेशनल है। दोनों के बीच का प्रोफेशनल रिश्ता कहानी में एक अलग ही तनाव और गहराई जोड़ता है।

महिला की हत्या की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले राज सामने आते हैं। पति पर शक होना स्वाभाविक है, लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकती। हर संदिग्ध का एक अतीत है, हर मुस्कान के पीछे कोई न कोई रहस्य छिपा है।

सीरीज यह दिखाती है कि अपराध केवल व्यक्तिगत नहीं होते, बल्कि सामाजिक दबाव, पारिवारिक अपेक्षाएं और सत्ता की राजनीति भी कई बार हत्या जैसे जघन्य कृत्य को जन्म देती है। जांच के दौरान अमरपाल और धनवंत कौर को न केवल सबूतों से, बल्कि अपने-अपने अंदर के द्वंद्व से भी जूझना पड़ता है।

“कोहरा 2” की सबसे बड़ी ताकत इसका अभिनय है। बरुण सोबती अमरपाल गरुंडी के किरदार में गहराई और सादगी दोनों लेकर आते हैं। उनकी आंखों में छिपी थकान और संवेदना किरदार को विश्वसनीय बनाती है। मोना सिंह धनवंत कौर के रूप में मजबूत और प्रभावशाली नजर आती हैं। उनका शांत लेकिन कठोर अंदाज कहानी को मजबूती देता है। पूजा भामर्रा और रणविजय सिंह सहायक भूमिकाओं में कहानी को संतुलन प्रदान करते हैं और संदेह की परतों को और गाढ़ा करते हैं।

निर्देशक रणदीप झा ने “कोहरा 2” में माहौल निर्माण पर खास ध्यान दिया है। धुंध से ढके खेत, सुनसान गलियां और ठंडी रोशनी में शूट किए गए दृश्य सिरीज को एक अलग ही पहचान देते हैं। कैमरा वर्क और बैकग्राउंड स्कोर कहानी की गंभीरता को और गहराता है।

“कोहरा 2” केवल यह सवाल नहीं पूछती कि “कातिल कौन है?”, बल्कि यह भी पूछती है कि “अपराध क्यों हुआ?”। यह सिरीज विवाह, पारिवारिक तनाव, पुरुष वर्चस्व और ग्रामीण समाज की चुप्पियों पर भी सवाल खड़े करती है। यही भावनात्मक गहराई इसे एक साधारण क्राइम थ्रिलर से ऊपर उठाती है।

“कोहरा 2” उन दर्शकों के लिए है जो तेज रफ्तार के साथ-साथ गहरी कहानी पसंद करते हैं। यह सिरीज अपराध की धुंध में छिपी सच्चाइयों को धीरे-धीरे उजागर करती है और अंत तक दर्शक को बांधे रखती है। मजबूत अभिनय, सधी हुई पटकथा और प्रभावशाली निर्देशन के कारण “कोहरा 2” भारतीय क्राइम थ्रिलर सिरीज में एक महत्वपूर्ण नाम बनकर उभरती है।



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