बिहार में वित्तीय पारदर्शिता और जनभागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम पहल की गई है। राज्य में गठित सप्तम राज्य वित्त आयोग (7th State Finance Commission) को अब आम नागरिक भी अपने सुझाव ऑनलाइन दे सकेंगे। इसके लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट 7thsfc.bihar.gov.in लॉन्च की गई है, जिससे जनता सीधे आयोग तक अपनी बात पहुंचा सकेगी।
इस वेबसाइट का लोकार्पण सोमवार को पटना के गर्दनीबाग स्थित वित्त विभाग के सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान किया गया। इस अवसर पर आयोग के अध्यक्ष सह पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार चौधरी, आयोग के सदस्य एवं बिहार प्रशासनिक सेवा के पूर्व पदाधिकारी अनिल कुमार तथा पटना विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष डॉ. कुमुदिनी सिन्हा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में आयोग के उद्देश्यों, कार्यक्षेत्र और नई ऑनलाइन व्यवस्था की विस्तार से जानकारी दी गई।
राज्य सरकार का मानना है कि वित्तीय योजनाओं और संसाधनों के बेहतर वितरण के लिए आम जनता की भागीदारी बेहद जरूरी है। इस नई व्यवस्था के तहत पंचायत प्रतिनिधि, नगर निकाय, सामाजिक संगठन, शिक्षाविद्, अर्थशास्त्री और आम नागरिक वित्तीय विषयों से जुड़े अपने सुझाव सीधे आयोग को भेज सकेंगे। इससे जमीनी स्तर की समस्याएं और आवश्यकताएं नीति निर्माण में बेहतर तरीके से शामिल हो सकेंगी।
सप्तम वित्त आयोग को भेजे जाने वाले सुझावों में खासतौर पर पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के वित्तीय सशक्तिकरण, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच संसाधनों के बंटवारे, स्थानीय विकास कार्यों के लिए अनुदान व्यवस्था, राजस्व बढ़ाने के नए उपाय, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता जैसे विषय शामिल हैं। आयोग इन सभी पहलुओं पर प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर अपनी सिफारिशों में शामिल करेगा।
सप्तम राज्य वित्त आयोग का मुख्य कार्य राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के बीच वित्तीय संसाधनों के न्यायसंगत वितरण को सुनिश्चित करना है। आयोग की सिफारिशों के आधार पर आने वाले वर्षों में पंचायतों और नगर निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार चौधरी ने कहा है कि डिजिटल माध्यम से सुझाव लेने की व्यवस्था से आयोग को व्यावहारिक और जमीनी सुझाव मिलेंगे, जिससे रिपोर्ट अधिक प्रभावी बनेगी।
सप्तम वित्त आयोग की वेबसाइट का शुभारंभ बिहार में ई-गवर्नेंस और सहभागी लोकतंत्र की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अब वित्तीय नीतियों पर केवल विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि आम लोग भी अपनी राय रख सकेंगे। यह पहल न केवल निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करेगी, बल्कि राज्य के समग्र विकास में जनता की सीधी भागीदारी भी सुनिश्चित करेगी।
