आसाराम के अहमदाबाद आश्रम पर चलेगा बुलडोजर

Jitendra Kumar Sinha
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अहमदाबाद के मोटेरा क्षेत्र में स्थित स्वयंभू संत आसाराम का मुख्य आश्रम एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गया है। गुजरात हाईकोर्ट ने इस आश्रम से जुड़ी करीब 45,000 वर्ग मीटर से अधिक भूमि को राज्य सरकार के कब्जे में लेने और वहां बने अवैध ढांचों को हटाने की अनुमति दे दी है। अदालत के इस फैसले के बाद यह लगभग तय हो गया है कि आश्रम परिसर पर जल्द ही बुलडोजर चलेगा।


इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट की जस्टिस वैभवी नानावती की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जमीन का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुसार नहीं किया गया है और यह भूमि राज्य की विकास परियोजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अदालत ने माना है कि राज्य सरकार द्वारा जमीन वापस लेने की कार्रवाई कानूनसम्मत और जनहित में है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक संस्था को नियमों से ऊपर नहीं रखा जा सकता है।


कोर्ट के समक्ष यह तथ्य रखा गया था कि आश्रम परिसर में कई ऐसे ढांचे बनाए गए हैं, जिनके लिए न तो वैध अनुमति ली गई और न ही भूमि उपयोग की शर्तों का पालन किया गया है। वर्षों से यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में विवादित रही है और आश्रम प्रबंधन द्वारा इसे अपने कब्जे में रखकर व्यावसायिक एवं संस्थागत गतिविधियाँ संचालित की जाती रहीं है। अदालत ने इसे स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन माना है।


जिस जमीन को अब राज्य सरकार वापस ले रही है, उसकी मौजूदा बाजार कीमत 500 करोड़ रुपये से भी अधिक आंकी जा रही है। मोटेरा क्षेत्र, जहां यह आश्रम स्थित है, अहमदाबाद का तेजी से विकसित होता इलाका है। नरेन्द्र मोदी स्टेडियम और अन्य बुनियादी ढांचों के कारण इस क्षेत्र का रियल एस्टेट मूल्य लगातार बढ़ा है। ऐसे में इतनी बड़ी और कीमती भूमि का अवैध कब्जा सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय रहा है।


इस जमीन का उपयोग अब 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए प्रस्तावित एक अत्याधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण में किया जाएगा। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया है कि यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं विकसित करने के लिए बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट ने विकास परियोजना की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए कहा है कि सार्वजनिक हित निजी हित से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।


यह फैसला आसाराम और उनके आश्रम के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है। पहले से ही आसाराम कई गंभीर आपराधिक मामलों में सजा काट रहे हैं। अब आश्रम की जमीन पर से भी हाथ जाना उनके संगठन के लिए एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों तरह की हार मानी जा रही है। यह मामला उन संस्थाओं के लिए भी चेतावनी है, जो धार्मिक आवरण में कानून की अनदेखी करती रही हैं।


हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार को अब किसी अतिरिक्त कानूनी अड़चन का सामना नहीं करना पड़ेगा। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जल्द ही भूमि अधिग्रहण और अवैध ढांचों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बुलडोजर कार्रवाई को लेकर स्थानीय प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।


गुजरात हाईकोर्ट का यह फैसला केवल एक जमीन विवाद का निपटारा नहीं है, बल्कि यह संदेश भी है कि कानून के सामने कोई भी संस्था, व्यक्ति या संगठन विशेष नहीं है। सार्वजनिक विकास परियोजनाओं के लिए नियमों का पालन अनिवार्य है, चाहे वह आश्रम हो या कोई अन्य प्रभावशाली संस्थान। आसाराम के अहमदाबाद आश्रम पर चलने वाला बुलडोजर कानून के राज और विकास प्राथमिकताओं का प्रतीक बनता जा रहा है।



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