बिहार में ग्रामीण विकास को गति देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। राज्य सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग ने सुलभ संपर्कता योजना के तहत 24 जिलों में 73 नई ग्रामीण सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी है। इस योजना के अंतर्गत 515 करोड़ रुपये की लागत से कुल 254.40 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को जिला मुख्यालयों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों से बेहतर ढंग से जोड़ना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्कता किसी भी राज्य के समग्र विकास की रीढ़ मानी जाती है। बेहतर सड़कें न केवल आवागमन को आसान बनाती हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार के अवसरों तक पहुंच को भी सशक्त करती हैं। सुलभ संपर्कता योजना के माध्यम से राज्य सरकार का लक्ष्य है कि दूर-दराज के गांवों को बाजार, अस्पताल, स्कूल, प्रखंड और जिला स्तर के संस्थानों से जोड़ा जाए, ताकि ग्रामीण नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
इस परियोजना का सीधा लाभ राज्य के 24 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा। जिन इलाकों में अब तक कच्ची या जर्जर सड़कें थीं, वहां पक्की और मजबूत सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इससे न केवल स्थानीय लोगों का जीवन आसान होगा, बल्कि इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। किसान अपनी उपज को आसानी से मंडियों तक पहुंचा सकेंगे और छोटे व्यापारियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
स्वीकृत योजनाओं के तहत 515 करोड़ रुपये की बड़ी राशि खर्च की जाएगी। इस बजट से 254.40 किलोमीटर लंबी नई ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया जाएगा। गुणवत्ता, टिकाऊपन और समयबद्ध निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि ये सड़कें लंबे समय तक ग्रामीणों की सेवा कर सकें। आधुनिक मानकों के अनुरूप सड़कों के निर्माण से यातायात सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
सड़कों के निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। निर्माण कार्यों में स्थानीय मजदूरों, कारीगरों और छोटे ठेकेदारों को काम मिलेगा। इसके अलावा, बेहतर संपर्कता से गांवों में निवेश बढ़ेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
24 जिलों में 73 नई ग्रामीण सड़कों की मंजूरी बिहार के ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सुलभ संपर्कता योजना के तहत किया जा रहा यह निवेश राज्य के लाखों ग्रामीण नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएगा। बेहतर सड़कें केवल रास्ते नहीं बनातीं, बल्कि विकास, अवसर और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
