प्रकृति का रहस्यमय चमत्कार - मशरूम जैसा दिखता है “ब्लीडिंग टूथ फंगस”

Jitendra Kumar Sinha
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प्रकृति में कई ऐसी संरचनाएँ और जीव पाए जाते हैं, जो पहली नजर में किसी कल्पना लोक की रचना जैसे लगते हैं। इन्हीं में से एक है “ब्लीडिंग टूथ फंगस”, जिसे देखकर अक्सर लोग चौंक जाते हैं। इसकी सतह से टपकने वाली लाल बूंदें बिल्कुल खून जैसी प्रतीत होती हैं, जिससे यह मशरूमनुमा फंगस डरावना और रहस्यमय दोनों लगता है। हालांकि इसके पीछे छिपा विज्ञान उतना ही रोचक है जितना इसका रूप।

“ब्लीडिंग टूथ फंगस” एक दुर्लभ किस्म का फंगस है, जो आकार में मशरूम जैसा दिखाई देता है। इसकी पहचान इसकी ऊपरी सतह से निकलने वाले गाढ़े लाल तरल से होती है। इसी विशेषता के कारण इसे अंग्रेज़ी में “Bleeding Tooth” यानी “खून बहता दांत” कहा जाता है। प्रारंभिक अवस्था में इसका रंग सफेद या हल्का गुलाबी होता है, लेकिन जैसे-जैसे यह विकसित होता है, इसकी सतह पर लाल बूंदें उभरने लगती हैं।

यह फंगस मुख्य रूप से ठंडे और नम जलवायु वाले क्षेत्रों में पाया जाता है। यह शंकुधारी जंगलों में उगता है, जहां देवदार और पाइन जैसे पेड़ प्रचुर मात्रा में होते हैं। उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया के कुछ हिस्सों में इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है। यह आमतौर पर जंगल की जमीन पर, पेड़ों की जड़ों के आसपास उगता है, जहां मिट्टी में नमी और जैविक तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं।

“ब्लीडिंग टूथ फंगस” की सबसे अनोखी विशेषता है इसकी सतह से निकलने वाला लाल तरल। देखने में यह बिल्कुल खून जैसा लगता है, लेकिन वास्तव में यह खून नहीं होता है। यह तरल पौधों की जड़ों से खींचे गए पोषक तत्वों और विशेष रसायनों का मिश्रण होता है। जब फंगस अत्यधिक नमी और पोषक तत्वों को अवशोषित करता है, तो अतिरिक्त द्रव सतह के रोमछिद्रों से बाहर निकल आता है, जो लाल रंग का दिखाई देता है।

अपने डरावने रूप के बावजूद “ब्लीडिंग टूथ फंगस” को आमतौर पर इंसानों के लिए जहरीला नहीं माना जाता है। हालांकि, इसे खाने योग्य भी नहीं कहा जा सकता है। इसका स्वाद बेहद कड़वा होता है, जिससे इसे खाने का विचार ही अप्रिय हो जाता है। यही कारण है कि न तो इंसान और न ही जानवर इसे भोजन के रूप में अपनाते हैं।

वैज्ञानिकों की रुचि इस फंगस में केवल इसके अनोखे रूप के कारण नहीं है, बल्कि इसके भीतर छिपे रसायनों के कारण भी है। कुछ शोधों में संकेत मिले हैं कि इसमें ऐसे तत्व हो सकते हैं, जो रक्त के थक्के बनने से रोकने में सहायक हों। हालांकि यह क्षेत्र अभी शोध के शुरुआती चरण में है, फिर भी भविष्य में इससे नई दवाओं के विकास की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

“ब्लीडिंग टूथ फंगस” जंगल के ईकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह पेड़ों की जड़ों के साथ सहजीवी संबंध बनाता है, जिसे माइकोराइजल संबंध कहा जाता है। इस प्रक्रिया में फंगस पेड़ों को मिट्टी से पोषक तत्व और पानी उपलब्ध कराने में मदद करता है, जबकि पेड़ उसे ऊर्जा प्रदान करता है। इस तरह यह जंगल के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में योगदान देता है।

चूंकि यह फंगस दुर्लभ है और विशेष पर्यावरणीय परिस्थितियों में ही उगता है, इसलिए जंगलों की कटाई और जलवायु परिवर्तन इसके अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है। ऐसे में आवश्यक है कि प्राकृतिक आवासों का संरक्षण किया जाए और लोगों में इस तरह के अनोखे जीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए।

“ब्लीडिंग टूथ फंगस” प्रकृति की उन अनगिनत रचनाओं में से एक है, जो यह याद दिलाती हैं कि धरती पर जीवन कितनी विविध और रहस्यमय शक्लों में मौजूद है। इसका खून जैसा दिखने वाला रूप भले ही डर पैदा करे, लेकिन इसके पीछे छिपा विज्ञान, पारिस्थितिक महत्व और औषधीय संभावनाएं इसे बेहद खास बनाती हैं। यह फंगस न केवल जंगल की सेहत का संकेतक है, बल्कि प्रकृति की अद्भुत कल्पनाशीलता का भी प्रमाण है।



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