डर की दुनिया में के लिए एक खौफनाक फिल्म है - “द कॉन्ज्यूरिंग: लास्ट राइट्स”

Jitendra Kumar Sinha
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यह फिल्म पिछले साल सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर इसने अच्छी कमाई के साथ-साथ दर्शकों की खूब सराहना भी बटोरी थी। अब ओटीटी पर इसकी रिलीज के साथ ही यह फिर से चर्चा में है।

फिल्म की कहानी 1980 के दशक में अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में सामने आए चर्चित ‘स्मर्ल हॉन्टिंग केस’ से प्रेरित है। यह मामला अपने समय में इसलिए चर्चा में रहा क्योंकि इसमें एक सामान्य परिवार के घर में असामान्य और हिंसक पैरानॉर्मल घटनाएं होने लगी थीं। लास्ट राइट्स में इसी वास्तविक घटना को रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ पेश किया गया है, जिससे कहानी और भी ज्यादा डरावनी और प्रभावशाली बन जाती है।

इस फिल्म में मशहूर पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर एड और लॉरेन वॉरेन एक बार फिर कहानी के केंद्र में हैं। दोनों अब सेमी-रिटायरमेंट की जिन्दगी जी रहे होते हैं, लेकिन एक निजी और बेहद खतरनाक हॉन्टिंग उन्हें फिर से मैदान में उतरने पर मजबूर कर देती है। इस बार मामला सिर्फ किसी घर या आत्मा तक सीमित नहीं है, बल्कि एक एंटीक मिरर से जुड़ा हुआ है, जिसमें छिपा अभिशाप लगातार हिंसक घटनाओं को जन्म देता है।

फिल्म का सबसे दिलचस्प पहलू यही अभिशप्त एंटीक मिरर है। यह आईना सिर्फ अतीत की परछाइयों को नहीं दिखाता है, बल्कि उन शक्तियों को भी आजाद करता है जो इंसानी डर और कमजोरी पर पलती हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, घटनाएं और भी भयावह होती जाती हैं। अचानक आवाजें, रहस्यमयी आकृतियां और जानलेवा हमले। यह सब दर्शकों को सीट से बांधे रखता है।

फिल्म में पैट्रिक विल्सन और वेरा फार्मिंगा ने एक बार फिर एड और लॉरेन वॉरेन के किरदारों को बखूबी निभाया है। पैट्रिक विल्सन का गंभीर और संघर्षशील अभिनय, वहीं वेरा फार्मिंगा की भावनात्मक गहराई फिल्म को मजबूत आधार देती है। सहायक कलाकार भी कहानी के माहौल को विश्वसनीय बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

फिल्म का निर्देशन Michael Chaves ने किया है, जो पहले भी द कॉन्ज्यूरिंग यूनिवर्स की फिल्मों में अपने डरावने विज़ुअल्स और सस्पेंस के लिए जाने जाते हैं। लाइटिंग, बैकग्राउंड म्यूजिक और साउंड डिजाइन फिल्म की जान हैं। अचानक आने वाले साइलेंट मोमेंट्स और फिर तेज डरावने दृश्य दर्शकों की धड़कन बढ़ा देते हैं।

जो लोग द कॉन्ज्यूरिंग सीरीज के प्रशंसक हैं, तो यह फिल्म मिस नहीं कर सकते। वास्तविक घटनाओं से प्रेरित कहानी इसे और भी प्रभावशाली बनाती है। दमदार अभिनय और सस्पेंस से भरपूर निर्देशन इसे एक यादगार हॉरर अनुभव बनाता है।

“द कॉन्ज्यूरिंग: लास्ट राइट्स” सिर्फ एक हॉरर फिल्म नहीं है, बल्कि डर, आस्था और इंसानी हिम्मत की कहानी भी है। यह फिल्म अंत तक बांधे रखता है और नींद उड़ाने की ताकत रखता है, यह फिल्म डर के शौकीनों के लिए यह एक परफेक्ट वीकेंड वॉच साबित हो सकती है।



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