आनंद एल राय के निर्देशन में बनी फिल्म ‘तेरे इश्क में’ अब थिएटर रिलीज के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। यह फिल्म भावनाओं, रिश्तों और आत्मपरिवर्तन की एक संवेदनशील कहानी कहती है। निर्देशक आनंद एल राय अपनी फिल्मों में आम इंसान की उलझनों और प्रेम की जटिलताओं को खास अंदाज में पेश करने के लिए जाने जाते हैं, और यह फिल्म भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाती है।
फिल्म की कहानी शंकर और मुक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है। शंकर एक गुस्सैल और विद्रोही कॉलेज छात्र है, जिसके भीतर असंतोष और उलझनें भरी हुई हैं। दूसरी ओर, मुक्ति एक गंभीर और समझदार शोधार्थी (पीएचडी स्कॉलर) है, जो समाज और मानव स्वभाव को समझने की कोशिश में जुटी है। कहानी तब मोड़ लेती है जब मुक्ति अपने शोध प्रबंध के लिए शंकर को विषय के रूप में चुनती है।
मुक्ति का उद्देश्य शंकर के व्यवहार, सोच और गुस्से को समझना और उसमें सकारात्मक बदलाव लाना है। वह धीरे-धीरे शंकर के करीब आती है, उससे संवाद करती है और उसे बदलने की कोशिश करती है। इसी प्रक्रिया में शंकर मुक्ति से प्रेम करने लगता है। यह प्रेम उसके लिए एक नया अनुभव होता है, जो उसे भीतर से बदलने लगता है। फिल्म इस चरण में यह दिखाती है कि कैसे प्रेम किसी इंसान के व्यक्तित्व को नई दिशा दे सकता है।
कहानी का सबसे भावनात्मक मोड़ तब आता है जब मुक्ति का शोध पूरा हो जाता है। अपने लक्ष्य को हासिल करने के बाद वह शंकर को छोड़ देती है। शंकर के लिए यह सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि उसकी जिंदगी का सहारा बन चुका था। अब सवाल यह है कि क्या मुक्ति का प्रेम सच्चा था या वह सिर्फ अपने शोध तक सीमित था? शंकर इस टूटन से कैसे उबरता है और आगे उसका जीवन किस दिशा में जाता है—इन सवालों के जवाब फिल्म देखने के बाद ही मिलते हैं।
फिल्म में धनुष ने शंकर के किरदार को गहराई और तीव्रता के साथ निभाया है। उनका अभिनय किरदार के गुस्से, प्रेम और टूटन को प्रभावशाली बनाता है। कृति सैनन ने मुक्ति के रूप में एक संतुलित और गंभीर किरदार को सशक्त ढंग से प्रस्तुत किया है। प्रकाश राज, परमवीर चीमा और जया भट्टाचार्य जैसे कलाकारों ने सहायक भूमिकाओं में कहानी को मजबूती दी है।
आनंद एल राय का निर्देशन फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने प्रेम को आदर्श नहीं, बल्कि जटिल और कभी-कभी स्वार्थ से भरा हुआ दिखाया है। संवाद, संगीत और दृश्य संयोजन फिल्म के भावनात्मक असर को बढ़ाते हैं।
‘तेरे इश्क में’ सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि क्या हर रिश्ता बराबरी और ईमानदारी पर टिका होता है। ओटीटी पर आई यह फिल्म उन दर्शकों के लिए खास है, जो गंभीर, भावनात्मक और सोचने पर मजबूर करने वाली कहानियां पसंद करते हैं।
