चरखा से चिप्स तक- बिहार की अर्थव्यवस्था में सेमीकंडक्टर की होगी क्रांति

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार लंबे समय तक श्रम-प्रधान अर्थव्यवस्था, कृषि आधारित उत्पादन और बड़े पैमाने पर पलायन के लिए जाना जाता रहा है। देश के अन्य राज्यों में उद्योग, आईटी और उच्च तकनीक के विस्तार के बीच बिहार अक्सर पिछड़ा हुआ माना गया है। लेकिन वर्ष 2026 की शुरुआत में बिहार कैबिनेट द्वारा बिहार सेमीकंडक्टर नीति को मंजूरी देना न केवल राज्य की औद्योगिक सोच में बदलाव का संकेत है, बल्कि यह भारत के सेमीकंडक्टर मिशन में बिहार की निर्णायक एंट्री भी है।

राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों (2030 तक) में बिहार की जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) में सेमीकंडक्टर सेक्टर की 5 प्रतिशत हिस्सेदारी का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे रोजगार, निवेश, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हिस्सेदारी का बड़ा सपना जुड़ा हुआ है।

मोबाइल फोन से लेकर मिसाइल, कार से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सुपरकंप्यूटर से लेकर मेडिकल उपकरण, आज की दुनिया का कोई भी क्षेत्र सेमीकंडक्टर चिप्स के बिना चल ही नहीं सकता है। इसीलिए विशेषज्ञ सेमीकंडक्टर को 21वीं सदी का तेल (Oil of the Digital Age) कहते हैं।

कोविड-19 के बाद वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने दुनिया को यह एहसास कराया कि चिप्स का अत्यधिक केंद्रीकरण (मुख्यतः ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन में) कितना जोखिम भरा है। भारत ने इसी पृष्ठभूमि में India Semiconductor Mission (ISM) की शुरुआत की और राज्यों को इसमें भागीदार बनने के लिए प्रोत्साहित किया है।

बिहार सरकार ने यह स्वीकार किया है कि केवल पारंपरिक उद्योगों से राज्य की आर्थिक छलांग संभव नहीं है। इसलिए एक ऐसी नीति की जरूरत थी जो उच्च तकनीक आधारित हो। दीर्घकालिक रोजगार पैदा करे। वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करे और स्थानीय युवाओं को पलायन से रोके।

बिहार सेमीकंडक्टर नीति की मुख्य विशेषताएं है कि 2030 तक GSDP में 5% योगदान का लक्ष्य, कम से कम तीन FAB/ATMP यूनिट, प्रत्येक यूनिट में 5000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश, केंद्र सरकार की सब्सिडी के अतिरिक्त 20% राज्य प्रोत्साहन, डिजाइन हाउस, पैकेजिंग और टेस्टिंग पर विशेष जोर दिया गया है।

FAB यानि फैब्रिकेशन यूनिट वह जगह होती है जहाँ सिलिकॉन वेफर पर माइक्रोस्कोपिक सर्किट बनाए जाते हैं। यह सबसे महंगी, तकनीकी और संवेदनशील प्रक्रिया होती है। एक FAB की लागत 5000 करोड़ से 40,000 करोड़ रुपये तक और अत्यधिक शुद्ध जल, बिजली और क्लीन-रूम की आवश्यकता पड़ती है। ATMP (Assembly, Testing, Marking & Packaging) यूनिट मे बने हुए चिप्स की टेस्टिंग, गुणवत्ता जांच और पैकेजिंग की जाती है। यह यूनिट रोजगार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होती हैं।

बिहार सरकार ने नीति को कागजों तक सीमित न रखते हुए बिहार सेमीकंडक्टर मिशन का गठन किया है। इसके अध्यक्ष, बिहार सरकार के मुख्य सचिव, और सदस्य के रूप में उद्योग विभाग, वित्तविभाग, आईटी विभाग, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी है। इसका उद्देश्य है सिंगल विंडो, तेज मंजूरी और निवेश सुविधा। इस मिशन का लक्ष्य है राज्य में निवेश प्रवाह बढ़ाना। स्वदेशी चिप निर्माण क्षमता विकसित करना और अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले सेमीकंडक्टर क्लस्टर बनाना।

चिप निर्माण केवल मशीनों से नहीं होता है, इसके लिए उच्च स्तरीय डिजाइन इंजीनियर चाहिए। बिहार में 10 से अधिक डिजाइन हाउस, VLSI, AI, IoT आधारित डिजाइन, स्टार्टअप्स और विश्वविद्यालयों की भागीदारी आवश्यक है। IIT, NIT और राज्य विश्वविद्यालयों की भूमिका होगी पाठ्यक्रमों में सेमीकंडक्टर डिजाइन करना, इंडस्ट्री-एकेडेमिया सहयोग करना, इंटर्नशिप और ऑन-जॉब ट्रेनिंग देना।

यदि कोई कंपनी बिहार के मूल निवासियों को प्राथमिकता देती है और स्थानीय युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देती है, तो उसे अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी। प्रत्यक्ष रोजगार में 25,000+, अप्रत्यक्ष रोजगार में 1 लाख+ और उच्च वेतन, तकनीकी नौकरियां शामिल है। GCC यानि वह केंद्र जहाँ R&D, डिजाइन, डेटा एनालिटिक्स, इंजीनियरिंग सपोर्ट किए जाते हैं। बिहार में GCC प्रोत्साहन के लिए 50 करोड़ रुपये तक पूंजीगत सब्सिडी, रेंटल सब्सिडी और तेज भूमि आवंटन प्रावधान किया गया है। सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए निरंतर बिजली, अल्ट्रा-प्योर पानी, बेहतर सड़क और एयर कनेक्टिविटी, बिहार को बड़े पैमाने पर निवेश करना होगा। इसमें स्किल गैप, प्रारंभिक निवेश का जोखिम और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की चुनौती है।

गुजरात के FAB हब, तमिलनाडु के ATMP और इलेक्ट्रॉनिक्स तथा कर्नाटक के डिजाइन और R&D से बिहार सीखते हुए मानव संसाधन आधारित मॉडल पर आगे बढ़ सकता है। जब गांव का युवा पटना, गया या मुजफ्फरपुर में ही हाई-टेक नौकरी पाएगा, तो सामाजिक और संतुलन, पारिवारिक स्थिरता बढ़ेगी। इससे अब बिहार केवल “मजदूर सप्लाई स्टेट” नहीं रहेगा बल्कि “टेक्नोलॉजी पार्टनर स्टेट” के रूप में उभरेगा।

बिहार सेमीकंडक्टर नीति केवल एक औद्योगिक नीति नहीं है, यह राज्य की आत्मछवि बदलने का प्रयास है। यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले दशक में बिहार भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था एक्स सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन और तकनीकी नवाचार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।



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