नई दिल्ली की परिवहन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली दिल्ली मेट्रो केवल आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का भी प्रतिबिंब है। इसी कड़ी में मयूर विहार पॉकेट-1 मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर ‘श्रीराम मंदिर मयूर विहार’ किया जाना एक महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में सामने आया है। यह फैसला लंबे समय से चली आ रही मांग और जनभावनाओं के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
दिल्ली सरकार की राज्य नाम प्राधिकरण कमेटी ने मयूर विहार पॉकेट-1 मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने को औपचारिक स्वीकृति दी है। इस फैसले के साथ ही स्टेशन अब ‘श्रीराम मंदिर मयूर विहार’ के नाम से जाना जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
मयूर विहार क्षेत्र में स्थित श्रीराम मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठान, रामकथा और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। मंदिर न केवल पूजा का स्थान है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी केंद्र रहा है। ऐसे में मेट्रो स्टेशन का नाम मंदिर के नाम पर रखा जाना क्षेत्र की पहचान को और सशक्त करता है।
स्थानीय निवासियों का मानना था कि मेट्रो स्टेशन का नाम श्रीराम मंदिर के नाम पर होने से न केवल धार्मिक भावनाओं को सम्मान मिलेगा, बल्कि बाहर से आने वाले यात्रियों को भी क्षेत्र की पहचान समझने में आसानी होगी। कई वर्षों से इस मांग को लेकर ज्ञापन, जनप्रतिनिधियों से मुलाकात और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किया जा रहा था। अब इस निर्णय के बाद लोगों में संतोष और उत्साह दोनों देखने को मिल रहा है।
भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति में मर्यादा, धर्म और आदर्श जीवन के प्रतीक माने जाते हैं। राजधानी दिल्ली जैसे महानगर में सार्वजनिक स्थानों का नामकरण सांस्कृतिक विरासत से जुड़ना समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का माध्यम बनता है। ‘श्रीराम मंदिर मयूर विहार’ नाम न केवल एक धार्मिक पहचान देता है, बल्कि भारतीय सभ्यता और मूल्यों की निरंतरता को भी दर्शाता है।
मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने से क्षेत्र की ब्रांडिंग भी मजबूत होती है। धार्मिक आस्था से जुड़े लोग, पर्यटक और श्रद्धालु अब सीधे स्टेशन के नाम से ही मंदिर तक पहुंचने का संकेत पा सकेंगे। इससे स्थानीय व्यापार, छोटे दुकानदारों और क्षेत्रीय गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। शहरी नियोजन में ऐसे नाम परिवर्तन अक्सर क्षेत्रीय पहचान को नई दिशा देता है।
राज्य नाम प्राधिकरण कमेटी का यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। सरकार का कहना है कि नाम परिवर्तन किसी भी प्रकार के भेदभाव के बिना जनभावनाओं और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संदर्भों के आधार पर किया गया है। ऐसे फैसलों पर राजनीतिक बहस भी होती है, लेकिन समर्थकों का तर्क है कि यह सांस्कृतिक सम्मान और स्थानीय पहचान को मान्यता देने का कदम है।
मयूर विहार पॉकेट-1 मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर ‘श्रीराम मंदिर मयूर विहार’ किया जाना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि आस्था, संस्कृति और स्थानीय पहचान का प्रतीक है। यह कदम दर्शाता है कि आधुनिक शहरी ढांचे के साथ-साथ परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को भी समान महत्व दिया जा सकता है। आने वाले समय में यह स्टेशन न सिर्फ यात्रियों के लिए एक पड़ाव होगा, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का स्थायी प्रतीक भी बनेगा।
