सरकारी बैंक के न्यूनतम बैलेंस की अनिवार्यता में मिलेगी राहत

Jitendra Kumar Sinha
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बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी एक संभावित राहत भरी खबर सामने आ रही है। देश के कुछ सरकारी बैंक न्यूनतम बैलेंस (Minimum Balance) की अनिवार्यता की गणना के तरीके में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो लाखों खाताधारकों को बार-बार लगने वाली पेनल्टी से बड़ी राहत मिल सकती है। खासकर वे लोग, जिनकी आमदनी अनियमित है या जो सीमित संसाधनों के साथ बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करते हैं।


अब तक अधिकतर बैंकों में यह व्यवस्था रही है कि यदि किसी भी एक दिन खाते में तय न्यूनतम राशि से कम बैलेंस हुआ, तो ग्राहक पर जुर्माना (Penalty) लगा दिया जाता था। यह पद्धति कई बार अनुचित मानी जाती रही है, क्योंकि महीने के बाकी दिनों में बैलेंस पर्याप्त होने के बावजूद, सिर्फ एक दिन की कमी पर, पूरे महीने का शुल्क वसूल लिया जाता था। इससे निम्न आय वर्ग, पेंशनभोगी, छात्र और ग्रामीण क्षेत्रों के खाताधारक सबसे अधिक प्रभावित होते थे।


नए प्रस्ताव के तहत, न्यूनतम बैलेंस की गणना एवरेज मंथली बैलेंस (Average Monthly Balance – AMB) के आधार पर की जा सकती है। इसका मतलब यह होगा कि पूरे महीने के दैनिक बैलेंस का औसत निकाला जाएगा, यदि यह औसत तय सीमा से ऊपर रहा, तो किसी एक-दो दिन बैलेंस कम होने पर भी कोई पेनल्टी नहीं लगेगी। 


मान लीजिए किसी खाते के लिए न्यूनतम बैलेंस 3,000 रुपये तय है। महीने के 25 दिन बैलेंस 5,000 रुपये रहा और 5 दिन 1,000 रुपये रह गया, तो औसत बैलेंस फिर भी 3,000 रुपये से अधिक होगा, और ग्राहक को पेनल्टी से राहत मिल सकती है।


इस बदलाव के लागू होने से खाताधारकों को कई स्तरों पर लाभ मिल सकता है। अब एक दिन की चूक पर सीधा जुर्माना नहीं लगेगा। लोग अपनी आय-व्यय को महीने भर में संतुलित कर सकेंगे। जिनकी आमदनी महीने के कुछ ही दिनों में आती है, उन्हें विशेष लाभ मिलेगा। बिना डर के लोग UPI, ATM और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर सकेंगे।


अभी इस पर आधिकारिक अधिसूचना नहीं आई है, लेकिन चर्चा है कि कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इस दिशा में पहल कर सकते हैं, जैसे भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा। इन बैंकों के पास देश के सबसे अधिक बचत खाते हैं, इसलिए इनके फैसले का असर बड़े पैमाने पर ग्राहकों पर पड़ेगा।


संभावना है कि यह राहत बेसिक सेविंग अकाउंट, जन-धन खाते और कुछ सामान्य बचत खातों पर पहले लागू की जाए। वहीं, प्रीमियम या विशेष खातों में अलग शर्तें बनी रह सकती हैं। अंतिम निर्णय बैंक की आंतरिक नीति और RBI के दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगा।


बैंकों पर भी लगातार यह दबाव रहा है कि ग्राहकों की शिकायतें कम हो, वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा मिले और डिजिटल बैंकिंग को अधिक अपनाया जाए। इसके अलावा, कई बार पेनल्टी से मिलने वाली राशि के मुकाबले ग्राहक असंतोष और खाते बंद होने का नुकसान ज्यादा हो जाता है। ऐसे में बैंकों के लिए यह बदलाव व्यावहारिक भी है।


यह बदलाव राहत भरा है, फिर भी खाताधारकों को चाहिए कि अपने खाते की न्यूनतम बैलेंस नीति समय-समय पर जांचें। बैंक से मिलने वाले SMS/ईमेल नोटिस ध्यान से पढ़ें और जरूरत हो तो जीरो बैलेंस या बेसिक अकाउंट का विकल्प चुनें।


न्यूनतम बैलेंस की गणना में प्रस्तावित यह बदलाव अगर लागू होता है, तो यह बैंकिंग इतिहास में ग्राहक-केंद्रित सुधार के रूप में देखा जाएगा। एवरेज मंथली बैलेंस का सिद्धांत न सिर्फ लोगों को आर्थिक रूप से राहत देगा, बल्कि बैंक और ग्राहक के रिश्ते को भी ज्यादा भरोसेमंद बनाएगा। अब सभी की नजरें बैंकों की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि यह राहत कब और कैसे लागू होगी।



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