बड़े लेनदेन के लिए यूपीआइ पेमेंट में बढ़ेगी सुरक्षा

Jitendra Kumar Sinha
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डिजिटल भुगतान ने भारत में लेनदेन की तस्वीर ही बदल दी है। खासकर यूपीआइ (UPI) के जरिए चंद सेकेंड में पैसे भेजना या प्राप्त करना आम बात हो गई है। लेकिन जैसे-जैसे यूपीआइ का दायरा बढ़ा है, वैसे-वैसे साइबर फ्रॉड और ठगी के मामले भी सामने आए हैं। इसी को देखते हुए अब यूपीआइ पेमेंट को और सुरक्षित बनाने की तैयारी की जा रही है। प्रस्ताव है कि बड़े अमाउंट के ट्रांजेक्शन में केवल यूपीआइ पिन पर्याप्त न हो, बल्कि अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अनिवार्य किए जाएं।


यूपीआइ आधारित भुगतान फिलहाल एक सिंगल-फैक्टर ऑथेंटिकेशन पर आधारित है, जिसमें यूजर सिर्फ अपना यूपीआइ पिन डालकर भुगतान कर देता है। यह सुविधा जितनी आसान है, उतनी ही जोखिम भरी भी हो सकती है। मोबाइल चोरी या हैक होने पर, फर्जी कॉल या फिशिंग के जरिए पिन निकल जाने पर और मैलवेयर या स्क्रीन शेयरिंग जैसे तरीकों से, ठग बड़ी रकम निकाल सकते हैं। ऐसे मामलों में यूजर को नुकसान झेलना पड़ता है और बैंकों पर भी दबाव बढ़ता है। इसलिए अब जरूरत महसूस की जा रही है कि हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन के लिए सुरक्षा का स्तर बढ़ाया जाए।


बैंकों और नियामक संस्थाओं के स्तर पर जिन विकल्पों पर चर्चा हो रही है, उनमें मुख्य रूप से मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) शामिल है। इसके तहत पिन के अलावा एक या अधिक अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत होगी, जैसे फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन के जरिए ट्रांजेक्शन को मंजूरी दी जा सकती है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि भुगतान वही व्यक्ति कर रहा है, जिसके खाते से पैसे जा रहा है। बड़े अमाउंट के ट्रांजेक्शन पर पिन के साथ-साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जा सकता है। अगर कोई ट्रांजेक्शन नए डिवाइस या संदिग्ध लोकेशन से हो रहा है, तो अतिरिक्त पुष्टि मांगी जा सकती है।


संभावना है कि ये अतिरिक्त सुरक्षा उपाय सभी यूपीआइ ट्रांजेक्शन पर लागू न होकर केवल उच्च राशि के लेनदेन पर ही अनिवार्य किए जाएं। उदाहरण के लिए 50,000 रुपये या उससे अधिक की राशि। एक दिन में तय सीमा से ज्यादा भुगतान। पहली बार किसी नए मर्चेंट या अकाउंट को पैसे भेजते समय। इससे छोटे और रोजमर्रा के भुगतान आसान बने रहेंगे, जबकि बड़ी रकम सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर होगी।


कई यूजर्स को यह डर हो सकता है कि अतिरिक्त स्टेप्स से भुगतान प्रक्रिया जटिल हो जाएगी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सिक्योरिटी और सुविधा के बीच संतुलन बनाया जाएगा। छोटे पेमेंट पहले की तरह आसान रहेंगे। बड़े पेमेंट में कुछ सेकेंड ज्यादा लग सकते हैं। लेकिन इससे फ्रॉड का जोखिम काफी कम हो जाएगा। आज जब लोग यूपीआइ के जरिए लाखों रुपये तक का लेनदेन कर रहे हैं, तो थोड़ी अतिरिक्त सावधानी फायदेमंद ही मानी जाएगी।


भारत में यूपीआइ सिस्टम का संचालन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) करता है और इसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। NPCI तकनीकी ढांचे में बदलाव करेगा। बैंक अपने-अपने स्तर पर जोखिम के अनुसार नियम लागू कर सकते हैं। RBI इन बदलावों की निगरानी करेगा ताकि यूजर हित सुरक्षित रहे।


चाहे नियम बदलें या न बदलें, कुछ सावधानियां हर यूपीआइ यूजर को हमेशा रखनी चाहिए। कभी भी अपना यूपीआइ पिन किसी से साझा न करें। अनजान लिंक या कॉल पर भरोसा न करें। मोबाइल में स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स से सावधान रहें। संदिग्ध ट्रांजेक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें।


यूपीआइ ने भारत को डिजिटल भुगतान में दुनिया का अग्रणी देश बना दिया है। अब समय आ गया है कि सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा को भी अगले स्तर पर ले जाया जाए। बड़े अमाउंट के ट्रांजेक्शन में बायोमेट्रिक या मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसे कदम न सिर्फ फ्रॉड को रोकेंगे, बल्कि यूजर्स का भरोसा भी मजबूत करेंगे। कुल मिलाकर, आने वाले समय में यूपीआइ पेमेंट थोड़ा ज्यादा सुरक्षित और उतना ही भरोसेमंद बनने जा रहा है।



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