सुशासन की दिशा में नया कदम - विदेशों की कार्यप्रणाली से बदलेगी बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार सरकार अब विदेशों में अपनायी जा रही बेहतर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अपने विभागों में लागू करने की दिशा में गंभीर पहल कर रही है। राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जो भी अधिकारी सरकारी कार्य से विदेश यात्रा पर जायेंगे, उन्हें लौटने के बाद पंद्रह दिनों के अन्दर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। इस रिपोर्ट में यात्रा का उद्देश्य, वहां के प्रशासनिक अनुभव, तकनीकी व्यवस्थाएं और बिहार में लागू किये जा सकने वाले सुझाव शामिल होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिवों को स्पष्ट निर्देश जारी किये हैं।


यह कदम केवल औपचारिकता भर नहीं है, बल्कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। लंबे समय से यह शिकायत रही है कि विदेश यात्राओं पर होने वाला सरकारी खर्च अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाता। अब सरकार चाहती है कि इन यात्राओं से प्राप्त अनुभवों का वास्तविक लाभ राज्य की जनता तक पहुंचे।


सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राएं अक्सर अध्ययन, प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग या प्रशासनिक अनुभव प्राप्त करने के लिए होती है। कई विकसित देशों में प्रशासनिक पारदर्शिता, डिजिटल व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और नगर विकास की उत्कृष्ट प्रणालियां लागू है। बिहार सरकार का मानना है कि यदि इन व्यवस्थाओं के सफल मॉडल का अध्ययन कर उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू किया जाये, तो राज्य के विकास को गति मिल सकती है। इसी उद्देश्य से अब अधिकारियों को यह बताना होगा कि उन्होंने विदेश में क्या देखा, क्या सीखा और बिहार में कौन-सी व्यवस्थाएं लागू की जा सकती हैं। इससे यात्राओं की उपयोगिता भी बढ़ेगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।


सरकार का यह निर्णय प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। पहले कई बार यह देखा गया कि अधिकारी विदेश भ्रमण से लौटने के बाद कोई ठोस रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करते थे या फिर अनुभव केवल फाइलों तक सीमित रह जाते थे। अब पंद्रह दिनों की समय सीमा तय होने से अधिकारियों को गंभीरता से अपने अनुभव साझा करने होंगे। रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अनिवार्यता से यह भी पता चल सकेगा कि विदेश यात्रा पर खर्च की गयी सरकारी राशि का कितना सकारात्मक परिणाम निकला। यदि किसी अधिकारी ने किसी देश की प्रभावी व्यवस्था का अध्ययन किया है, तो उसका लाभ विभागीय नीतियों और योजनाओं में दिखना चाहिए।


इस नई व्यवस्था का असर केवल एक विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, परिवहन, जल प्रबंधन, कृषि और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे अनेक विभाग इससे लाभान्वित हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि कोई अधिकारी सिंगापुर या जापान की स्वच्छता व्यवस्था का अध्ययन करता है, तो उससे बिहार के नगर निकायों को बेहतर कचरा प्रबंधन प्रणाली विकसित करने में मदद मिल सकती है। इसी प्रकार यूरोपीय देशों की डिजिटल प्रशासन प्रणाली से प्रेरणा लेकर सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और ऑनलाइन बनाया जा सकता है।


दुनिया तेजी से डिजिटल और तकनीकी बदलावों की ओर बढ़ रही है। ऐसे में बिहार सरकार भी आधुनिक तकनीक को अपनाने पर जोर दे रही है। विदेशों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्मार्ट गवर्नेंस, ई-ऑफिस, ट्रैफिक ऑटोमेशन और डेटा आधारित नीति निर्माण जैसी व्यवस्थाएं तेजी से विकसित हुई हैं। यदि राज्य के अधिकारी इन व्यवस्थाओं को करीब से समझकर बिहार की जरूरतों के अनुरूप लागू करने का प्रयास करें, तो सरकारी कामकाज की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव है। इससे आम लोगों को सेवाएं प्राप्त करने में होने वाली परेशानी भी कम होगी।


अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट भविष्य की नीतियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है। सरकार इन रिपोर्टों के आधार पर यह तय कर सकती है कि किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है और किन अंतरराष्ट्रीय मॉडलों को अपनाना लाभकारी होगा। इसके अतिरिक्त युवा अधिकारियों के प्रशिक्षण में भी इन अनुभवों का उपयोग किया जा सकता है। इससे प्रशासनिक क्षमता का विकास होगा और शासन व्यवस्था अधिक व्यावहारिक एवं परिणामोन्मुख बनेगी।


बिहार पिछले कुछ वर्षों में प्रशासनिक सुधार और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में लगातार कदम उठा रहा है। सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करने, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई पहल की गयी हैं। विदेशों की सफल कार्यप्रणाली को अपनाने की यह नई पहल उसी श्रृंखला का हिस्सा मानी जा रही है। यदि अधिकारी गंभीरता से अपने अनुभव साझा करें और सरकार उन सुझावों को लागू करने की इच्छाशक्ति दिखाये, तो आने वाले समय में बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था अधिक आधुनिक, जवाबदेह और जनहितकारी बन सकती है।


विदेश यात्राओं के अनुभवों को विभागीय कार्यप्रणाली में शामिल करने का निर्णय एक दूरदर्शी पहल है। इससे न केवल सरकारी खर्च की सार्थकता बढ़ेगी, बल्कि प्रशासनिक सुधारों को भी नई दिशा मिलेगी। दुनिया के विकसित देशों की सफल व्यवस्थाओं से सीख लेकर यदि बिहार अपने प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करता है, तो इसका सीधा लाभ राज्य की जनता को मिलेगा। जवाबदेही, पारदर्शिता और नवाचार पर आधारित यह पहल भविष्य में सुशासन का मजबूत आधार बन सकती है।



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