19 मई से प्रत्येक माह के पहले और तीसरे मंगलवार को लगेंगे सहयोग शिविर

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार में आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर एक नई व्यवस्था शुरू होने जा रही है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि 19 मई से प्रत्येक माह के प्रथम एवं तृतीय मंगलवार को पंचायतवार “सहयोग शिविर” आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों का उद्देश्य नागरिकों की दैनिक जीवन से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान करना तथा प्रशासन को आम जनता के अधिक करीब लाना है।


जिलाधिकारी ने कहा है कि सरकार की प्राथमिकता है कि आम नागरिकों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसी सोच के तहत पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर लगाने का निर्णय लिया गया है। इन शिविरों में विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहेंगे और मौके पर ही लोगों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करने का प्रयास करेंगे।


प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी जवाबदेही सुनिश्चित होगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि शिविरों में आने वाली शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार किया जाए और निर्धारित समय सीमा में उनका निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।


सहयोग शिविरों में राजस्व, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन कार्ड, भूमि विवाद, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, मनरेगा, जल-नल योजना, बिजली, सड़क, शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसी बुनियादी समस्याओं से जुड़े मामलों पर सुनवाई की जाएगी। इसके अलावा सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी लोगों को दी जाएगी।


ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर जानकारी के अभाव और प्रशासनिक दूरी के कारण लोग योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं। ऐसे में पंचायत स्तर पर लगने वाले शिविर ग्रामीण जनता के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं। अब तक अधिकांश प्रशासनिक कार्य प्रखंड या जिला मुख्यालयों तक सीमित रहते थे, जिससे ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। सहयोग शिविरों के माध्यम से प्रशासन स्वयं गांवों तक पहुंचेगा। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस पहल को गंभीरता से लागू किया गया तो यह ग्रामीण प्रशासन की कार्यशैली में बड़ा बदलाव ला सकती है। पंचायत स्तर पर सीधा संवाद होने से लोगों का विश्वास भी प्रशासन पर बढ़ेगा। 


प्रशासन ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से भी अपील की है कि वे अधिक से अधिक लोगों को शिविरों में आने के लिए प्रेरित करें। अधिकारियों का कहना है कि जनता की सक्रिय भागीदारी से ही इस पहल को सफल बनाया जा सकता है। इसके अलावा शिविरों में प्राप्त शिकायतों की नियमित समीक्षा भी की जाएगी ताकि लंबित मामलों का शीघ्र समाधान हो सके। कई जिलों में इसके लिए अलग मॉनिटरिंग व्यवस्था बनाने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है।


बिहार सरकार की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सुशासन और सेवा वितरण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पंचायत स्तर पर नियमित सहयोग शिविर लगने से सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ेगी और लोगों की समस्याओं का समाधान अधिक तेजी से हो सकेगा।


यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो आने वाले समय में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। जनता और प्रशासन के बीच दूरी कम करने तथा सरकारी सेवाओं को सरल बनाने की दिशा में यह एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है।



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