बिहार में महिलाओं को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य में जीविका द्वारा 260 “जीविका दीदी अधिकार केंद्र” की शुरुआत की गई है, जो सभी 38 जिलों में संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना तथा लैंगिक आधारित हिंसा से जुड़ी समस्याओं के समाधान में सहायता प्रदान करना है। यह पहल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।
जीविका दीदी अधिकार केंद्र ऐसे सहायता केंद्र हैं जहां महिलाएं अपनी समस्याओं को खुलकर साझा कर सकती हैं। यहां उन्हें कानूनी सहायता, परामर्श, सरकारी योजनाओं की जानकारी और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इन केंद्रों का संचालन प्रशिक्षित जीविका दीदियों द्वारा किया जा रहा है, जो गांव-गांव जाकर महिलाओं को जागरूक करने का कार्य भी कर रही हैं। इन केंद्रों में घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, बाल विवाह, संपत्ति में अधिकार, कार्यस्थल पर उत्पीड़न तथा अन्य सामाजिक समस्याओं से संबंधित शिकायतों पर मार्गदर्शन दिया जाता है। साथ ही पीड़ित महिलाओं को संबंधित विभागों और संस्थाओं से जोड़कर सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर महिलाओं को सरकारी योजनाओं की सही जानकारी नहीं मिल पाती, जिसके कारण वे लाभ से वंचित रह जाती हैं। जीविका दीदी अधिकार केंद्र इस समस्या का समाधान बनकर उभरे हैं। यहां महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे उज्ज्वला योजना, विधवा पेंशन, मातृत्व लाभ योजना, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, स्वरोजगार योजनाएं और स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी जाती है। केंद्रों पर महिलाओं को आवेदन प्रक्रिया समझाने के साथ-साथ जरूरी दस्तावेज तैयार करने में भी सहायता दी जाती है। इससे महिलाओं की सरकारी तंत्र तक पहुंच आसान हुई है और उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है।
समाज में आज भी अनेक महिलाएं घरेलू हिंसा और सामाजिक उत्पीड़न का सामना करती हैं, लेकिन जानकारी और सहयोग के अभाव में वे अपनी आवाज नहीं उठा पातीं। जीविका दीदी अधिकार केंद्र ऐसे मामलों में महिलाओं के लिए सुरक्षित मंच का कार्य कर रहे हैं। यहां महिलाएं गोपनीय तरीके से अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। इन केंद्रों के माध्यम से पुलिस, महिला हेल्पलाइन, जिला प्रशासन और कानूनी सेवा प्राधिकरण से समन्वय स्थापित कर पीड़ित महिलाओं को त्वरित सहायता दिलाने का प्रयास किया जाता है। इससे महिलाओं में न्याय पाने की उम्मीद मजबूत हुई है।
बिहार में जीविका समूह पहले से ही महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभा रहा है। अब अधिकार केंद्रों के माध्यम से जीविका दीदियां सामाजिक और कानूनी जागरूकता फैलाने का भी कार्य कर रही हैं। गांवों में महिलाओं के बीच उनकी अच्छी पहचान और विश्वास होने के कारण वे आसानी से लोगों तक पहुंच बना पा रही हैं। जीविका दीदियां घर-घर जाकर महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और अधिकारों के प्रति जागरूक कर रही हैं। इसके अलावा वे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपने निर्णय स्वयं लेने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
इन अधिकार केंद्रों के शुरू होने से महिलाओं में आत्मविश्वास और जागरूकता का स्तर तेजी से बढ़ा है। अब महिलाएं अपनी समस्याओं को दबाने के बजाय खुलकर सामने ला रही हैं। कई महिलाएं सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर स्वरोजगार शुरू कर रही हैं और आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह पहल सामाजिक बदलाव का माध्यम भी बन रही है। महिलाएं अब पंचायत और सामाजिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय भागीदारी निभाने लगी हैं। इससे समाज में महिलाओं की स्थिति मजबूत हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीविका दीदी अधिकार केंद्र केवल सहायता केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के केंद्र बन सकते हैं। यदि इनका प्रभावी संचालन लगातार जारी रहा तो महिलाओं के खिलाफ हिंसा में कमी आएगी और लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार और जीविका के संयुक्त प्रयास से यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर, जागरूक और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। आने वाले समय में इन केंद्रों की संख्या और सेवाओं का विस्तार होने से अधिक महिलाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।
जीविका दीदी अधिकार केंद्र बिहार में महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। ये केंद्र महिलाओं को केवल सहायता ही नहीं दे रहे, बल्कि उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और आत्मविश्वासी भी बना रहे हैं। महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और कानूनी स्थिति मजबूत करने में यह पहल दूरगामी प्रभाव छोड़ सकती है। यदि समाज और प्रशासन का सहयोग इसी प्रकार मिलता रहा, तो बिहार की महिलाएं विकास और आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं।
