बढ़ रहा है अनोखा ब्यूटी ट्रेंड - “घोंघे की लार”

Jitendra Kumar Sinha
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दुनिया में सुंदर दिखने की चाह हमेशा से लोगों को नए-नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित करती रही है। कभी सोने के फेस मास्क, कभी चारकोल थेरेपी, तो कभी फलों से बने फेस पैक, ब्यूटी इंडस्ट्री लगातार नए ट्रेंड लेकर आती रहती है। अब इसी कड़ी में दक्षिण कोरिया से एक बेहद अनोखा और चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है, जिसे “स्नेल म्यूसिन” यानि घोंघे की लार थेरेपी कहा जा रहा है। सुनने में भले यह अजीब लगे, लेकिन कोरिया के लोग इसे त्वचा को चमकदार और जवान बनाए रखने का नया राज मान रहे हैं।


स्नेल म्यूसिन दरअसल घोंघे द्वारा छोड़ा गया एक चिपचिपा पदार्थ होता है। यह वही लार जैसी परत है, जिसे घोंघा चलते समय अपने पीछे छोड़ता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस म्यूसिन में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा के लिए लाभकारी माने जाते हैं। इसमें हयालूरोनिक एसिड, ग्लाइकोलिक एसिड, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे तत्व मौजूद होते हैं। हयालूरोनिक एसिड त्वचा को नमी देने में मदद करता है, जबकि ग्लाइकोलिक एसिड मृत कोशिकाओं को हटाकर नई त्वचा को उभरने में सहायक माना जाता है। यही कारण है कि स्नेल म्यूसिन को स्किन केयर उत्पादों में तेजी से शामिल किया जा रहा है।


दक्षिण कोरिया को दुनिया में “के-ब्यूटी” का केंद्र माना जाता है। वहां की ब्यूटी इंडस्ट्री हमेशा नए और अनोखे प्रयोगों के लिए मशहूर रही है। कोरियाई लोग त्वचा की देखभाल को जीवनशैली का अहम हिस्सा मानते हैं। ऐसे में स्नेल म्यूसिन का ट्रेंड वहां तेजी से लोकप्रिय हो गया है। कई लोग दावा कर रहे हैं कि घोंघे की लार से बने फेस सीरम और क्रीम इस्तेमाल करने से चेहरे के दाग-धब्बे कम होते हैं, त्वचा मुलायम बनती है और झुर्रियों में कमी आती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस ट्रेंड से जुड़े वीडियो और रिव्यू तेजी से वायरल हो रहे हैं।


विशेषज्ञों का कहना है कि स्नेल म्यूसिन में मौजूद पोषक तत्व त्वचा को रिपेयर करने में मदद कर सकते हैं। यह त्वचा की ऊपरी परत को हाइड्रेट रखता है और सूखेपन को कम करता है। इसके अलावा यह त्वचा में कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देने में भी सहायक माना जाता है, जिससे त्वचा अधिक युवा और चमकदार दिखाई देती है। कुछ स्किन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मुंहासों के निशान और हल्के दाग-धब्बों को कम करने में मदद कर सकता है। यही वजह है कि कई ब्यूटी ब्रांड अब स्नेल म्यूसिन युक्त फेस वॉश, सीरम, फेस मास्क और मॉइस्चराइजर बाजार में उतार रहे हैं।


कई लोग इसके फायदे गिना रहे हैं, लेकिन सभी विशेषज्ञ इससे पूरी तरह सहमत नहीं हैं। कुछ त्वचा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि स्नेल म्यूसिन हर व्यक्ति की त्वचा पर समान असर नहीं दिखाता। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में इससे एलर्जी या जलन की समस्या भी हो सकती है। इसके अलावा वैज्ञानिक शोध अभी भी सीमित हैं। कुछ अध्ययनों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, लेकिन इसे चमत्कारी उपचार मानना जल्दबाजी हो सकती है। डॉक्टरों की सलाह है कि किसी भी नए स्किन केयर उत्पाद को इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए।


इस ट्रेंड को लेकर एक बड़ा विवाद पशु अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। कई पशु प्रेमियों का कहना है कि घोंघों से म्यूसिन निकालने की प्रक्रिया उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि कई कंपनियां दावा करती हैं कि वे घोंघों को बिना नुकसान पहुंचाए यह प्रक्रिया अपनाती हैं, लेकिन इस पर बहस लगातार जारी है। कुछ पर्यावरणविदों का कहना है कि ब्यूटी इंडस्ट्री को ऐसे विकल्प खोजने चाहिए, जिनमें जानवरों का इस्तेमाल न हो। यही कारण है कि अब कई लोग वेगन और क्रूएल्टी-फ्री स्किन केयर उत्पादों की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं।


इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स ने इस ट्रेंड को दुनियाभर में लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। ब्यूटी इन्फ्लुएंसर्स स्नेल म्यूसिन से जुड़े अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। कुछ लोग इसे “ग्लास स्किन” पाने का राज बता रहे हैं, तो कुछ इसे एंटी-एजिंग का बेहतरीन उपाय मानते हैं। युवाओं में खासकर यह ट्रेंड तेजी से फैल रहा है। ऑनलाइन मार्केट में स्नेल म्यूसिन युक्त उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।


स्नेल म्यूसिन का यह ट्रेंड दिखाता है कि आधुनिक ब्यूटी इंडस्ट्री किस तरह लगातार नए प्रयोग कर रही है। हालांकि हर नया ट्रेंड सभी के लिए सुरक्षित या प्रभावी हो, यह जरूरी नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, अच्छी नींद और नियमित स्किन केयर सबसे अधिक जरूरी हैं। घोंघे की लार वाला यह ट्रेंड भले ही लोगों को आकर्षित कर रहा हो, लेकिन किसी भी उत्पाद को अपनाने से पहले उसकी वैज्ञानिक सच्चाई और संभावित दुष्प्रभावों को समझना बेहद जरूरी है। आखिरकार, सुंदरता केवल चमकती त्वचा में नहीं, बल्कि स्वस्थ और आत्मविश्वास से भरे व्यक्तित्व में भी होती है।


 


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