बिहार सरकार ने कला और संस्कृति से जुड़े कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना के तहत 153 नए कलाकारों के पेंशन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। गुरुवार को कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने इन प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की। इस निर्णय के बाद योजना से लाभान्वित कलाकारों की कुल संख्या बढ़कर 411 हो गई है। इससे पहले 258 कलाकार इस योजना का लाभ प्राप्त कर रहे थे। सरकार के इस फैसले को कलाकारों के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।
नए स्वीकृत कलाकारों को मई महीने से पेंशन की राशि प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना के तहत पात्र कलाकारों को प्रतिमाह तीन हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि भले ही बहुत बड़ी न हो, लेकिन उन कलाकारों के लिए यह महत्वपूर्ण सहयोग है जिन्होंने अपना जीवन कला के लिए समर्पित किया और अब उम्र या परिस्थितियों के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि कलाकार समाज की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को जीवित रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। ऐसे में उनका सम्मान और देखभाल करना सरकार की जिम्मेदारी भी है।
मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना का लाभ उन कलाकारों को दिया जाता है जिन्होंने कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। योजना के दायरे में लोक कलाकार, रंगकर्मी, गायक, वादक तथा विभिन्न पारंपरिक कला विधाओं से जुड़े कलाकार शामिल हैं। बिहार लोक कला और सांस्कृतिक विरासत का समृद्ध प्रदेश रहा है। यहां की लोक परंपराएं, गीत-संगीत, नाटक और लोकनृत्य देशभर में अपनी अलग पहचान रखते हैं। लेकिन बदलते समय के साथ कई पारंपरिक कला विधाएं धीरे-धीरे उपेक्षा का शिकार हुई हैं। ऐसे में सरकार की यह योजना उन कलाकारों के लिए राहत का माध्यम बनकर सामने आई है जो वर्षों से अपनी कला के संरक्षण में जुटे रहे।
ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने लोक संस्कृति को जीवित रखने में अपना पूरा जीवन लगा दिया। हालांकि आधुनिक मनोरंजन के बढ़ते प्रभाव के कारण इन कलाकारों की आय के स्रोत सीमित होते चले गए। अनेक कलाकार आर्थिक परेशानियों के बीच जीवन व्यतीत कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना उनके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। इससे न केवल कलाकारों को आर्थिक सहयोग मिलेगा बल्कि उन्हें यह एहसास भी होगा कि समाज और सरकार उनके योगदान का सम्मान कर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कलाकारों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि उनके लिए प्रशिक्षण, मंच और प्रस्तुति के अवसर भी बढ़ाने चाहिए ताकि नई पीढ़ी भी पारंपरिक कलाओं से जुड़ सके।
सरकार की इस पहल का एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी है कि कला और संस्कृति केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज की पहचान और इतिहास का हिस्सा हैं। कलाकार समाज की भावनाओं, परंपराओं और मूल्यों को अपनी कला के माध्यम से जीवित रखते हैं। जब सरकार कलाकारों को पेंशन जैसी योजनाओं के माध्यम से सहयोग देती है, तब इससे अन्य कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिलता है। इससे युवा पीढ़ी में कला के प्रति आकर्षण बढ़ सकता है और पारंपरिक विधाओं के संरक्षण को नई ऊर्जा मिल सकती है।
153 नए कलाकारों को योजना में शामिल किए जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में और अधिक पात्र कलाकारों को इससे जोड़ा जाएगा। राज्य में अभी भी कई ऐसे कलाकार हैं जो वर्षों से कला साधना कर रहे हैं और आर्थिक सहयोग की प्रतीक्षा में हैं। कला और संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा होती है। ऐसे में कलाकारों का सम्मान और उनकी सुरक्षा केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है। बिहार सरकार की यह पहल इसी दिशा में एक सार्थक और सराहनीय कदम मानी जा सकती है।
