तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 498 ईवी चार्जिंग स्टेशनों की मिली मंजूरी

Jitendra Kumar Sinha
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भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने देशभर के 74 प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर पर 4,874 सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की मंजूरी दी है। यह पहल प्रधानमंत्री ई-ड्राइव (PM E-Drive) योजना के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक वाहन अवसंरचना को मजबूत बनाना और हरित परिवहन को प्रोत्साहित करना है। तमिलनाडु को इस महत्वाकांक्षी परियोजना में विशेष महत्व दिया गया है। योजना के पहले चरण में राज्य में 498 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।


प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना है। वर्तमान समय में ईवी अपनाने में सबसे बड़ी चुनौती चार्जिंग सुविधाओं की उपलब्धता रही है। कई लोग लंबी दूरी की यात्रा के दौरान चार्जिंग स्टेशनों की कमी के कारण इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से हिचकते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार का निर्णय लिया है। योजना के तहत चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए कुल 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इनमें से 503 करोड़ रुपये की सब्सिडी विशेष रूप से इस परियोजना के लिए निर्धारित की गई है।


तमिलनाडु पहले से ही देश के प्रमुख औद्योगिक और ऑटोमोबाइल केंद्रों में शामिल है। राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण और उनसे संबंधित उद्योग तेजी से विकसित हो रहे हैं। ऐसे में 498 नए चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इन चार्जिंग स्टेशनों के स्थापित होने से न केवल निजी वाहन चालकों को सुविधा मिलेगी बल्कि सार्वजनिक परिवहन और वाणिज्यिक वाहनों के संचालन में भी सुधार होगा। इससे राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी। योजना के तहत जिन कॉरिडोरों का चयन किया गया है, उनमें चेन्नई, नागरकोइल, तूतीकोरिन और बेंगलूरु से जुड़े प्रमुख मार्ग शामिल हैं। ये मार्ग दक्षिण भारत के सबसे व्यस्त और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परिवहन मार्गों में गिने जाते हैं। इन राजमार्गों पर चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता से लंबी दूरी की यात्राएं अधिक सुविधाजनक बनेगी। वाहन चालकों को बैटरी समाप्त होने की चिंता नहीं रहेगी और वे आसानी से यात्रा कर सकेंगे।


देशभर में चयनित 74 रूटों में से 50 कॉरिडोर कारों और इलेक्ट्रिक बसों के लिए निर्धारित किए गए हैं। वहीं 24 कॉरिडोर विशेष रूप से मालवाहक ई-ट्रकों और कार्गो वाहनों के लिए चुने गए हैं। यह कदम लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। वर्तमान में माल परिवहन का बड़ा हिस्सा डीजल आधारित वाहनों पर निर्भर है। यदि ई-ट्रकों के लिए पर्याप्त चार्जिंग सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, तो परिवहन लागत में कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा।


इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने का सबसे बड़ा लाभ पर्यावरण संरक्षण के रूप में सामने आएगा। पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों के कारण वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है। ईवी के उपयोग से इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सरकार की यह पहल भारत को स्वच्छ और हरित ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली की ओर ले जाने में सहायक होगी। इससे जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी मदद मिलेगी।


तमिलनाडु में 498 नए ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना का निर्णय राज्य और देश दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। यह केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि भारत के हरित भविष्य की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। बेहतर चार्जिंग नेटवर्क के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति बढ़ेगी, पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा और देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम और आगे बढ़ेगा। आने वाले वर्षों में यह पहल भारत की परिवहन व्यवस्था में एक सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन सकती है।



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